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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस आज, ऑटिज्म पजल दिखाकर दिया संदेश

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में दो अप्रेल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस घोषित किया था।

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World Autism Awareness Day

विश्व ऑटिज्म दिवस सोमवार को मनाया जाएगा। दिव्या आयु हेल्थ ट्रस्ट की ओर से नोखा रोड़ स्थित हंशा गेस्ट हाउस में शाम को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. महेश पुरोहित एवं योगगुरु दीपक शर्मा सहित अन्य चिकित्सक शामिल होंगे।

डॉ. अमित पुरोहित के मुताबिक दुनियाभर में हर साल दो अप्रेल को ऑटिज्म दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में दो अप्रेल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस घोषित किया था। इस दिन ऐसे बच्चे और बड़ों जीवन में सुधार के प्रयास किए जाते हैं जो ऑटिज्म ग्रस्त होते हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक प्रति 110 में से एक बच्चा ऑटिज्म ग्रस्त
होता है।

क्या है ऑटिज्म
ऑटिज्म या आत्मविमोह/ स्वलीनता। यह एक मानसिक रोग है जो मस्तिष्क के विकास के दौरान होने वाला विकार है जो विकास संबंधी गंभीर विकार है। इसके लक्षण जन्म से या बाल्यावस्था (पहले तीन साल) में ही नजर आने लगते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों का एक ही काम को बार-बार दोहराना। मिर्गी के दौरे, बोलने व सुनने में समस्या आती है। ऑटिज्म डिस्ऑर्डर कहा जाता है।

जनजागृति
महर्षि पतंजलि योग संस्थान की आेर से जवाहर पार्क में रविवार को विश्व ऑटिज्म दिवस से पूर्व आम नागरिकों को ऑटिज्म पजल दिखाकर जनजागृति का संदेश दिया गया। फि जियोथैरेपिस्ट डॉ. अमित पुरोहित ने कहा कि ऑटिज्म (स्वलीनता) एक न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है।

इसमें बच्चा बोलने में विलंब या असमर्थ, अतिक्रियाशील, अकारण रोना-हंसना, शब्दों या गानों को बार-बार दोहराना, भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ आदि होता है। इस मौके पर डॉ. प्रीति गुप्ता, कन्हैयालाल सुथार, मदनलाल भाटी, अमित पुरोहित, दीपक शर्मा सहित गणमान्य लोग उपस्थित थे।

व्यक्ति को संस्कारित करता है संगीत
संगीत व्यक्ति को संस्कारित करता है, उसकी चुनौतियों की राह में सहायक बनता है। उसका चहुंमुखी विकास करता है। यह बात विवेक नगर में आयोजित संगीत शिक्षकों की बैठक में मुख्य वक्ता संगीतज्ञ अहमद बशीर सिसोदिया ने कही।

उन्होंने कहा कि शाला में संगीत शिक्षक की भूमिका बहुआयामी स्तरों पर रहती है। शाला का प्रारंभ संगीतमय प्रार्थना से होता है। एक संगीत शिक्षक अपने विषय के अध्यापन के साथ राष्ट्रीयता धर्म अध्यात्म से ओतप्रोत भक्ति संगीत से विद्यार्थियों को संस्कारित करता है।

कार्यक्रम संयोजक भगवानदास कटारिया ने राजस्थान में संगीत शिक्षा और शिक्षकों की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संगीत शिक्षकों के पद सृजन की आवश्यकता है। कार्यक्रम में सुंदर बिश्रोई, अक्षय कुमार , मुकेश चांवरिया, विवेक आदि ने भी विचार रखे।