
World Photography Day
विमल छंगाणी
बीकानेर. शहर से सटे उदासर गांव के एक खेत में २९.७५ बीघा भूमि में आठ साल के प्रयास के बाद एक स्वास्तिक चिह्न बनकर तैयार हुआ है। यह देश का सबसे बड़ा स्वास्तिक माना जा रहा है। जो आसमान से स्पष्ट दिखाई देता है। इसके चारों ओर पांच हजार से भी अधिक पौधे लगाकर स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया गया है। सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखने वाले स्वास्तिक चिह्न को बनाने वाले हरख चन्द नाहटा परिवार के सदस्य ललित कुमार नाहटा ने बताया कि वर्ष २०१० में इसका निर्माण शुरू करवाया। करीब एक साल बाद यह पूरा हो गया। इसके बाद स्वच्छ पर्यावरण के लिए स्वास्तिक के चारों ओर अनार के साढे़ चार हजार पौधे लगाए गए है। साथ ही फल-फूल वाले सैकड़ों पौधे भी लगे हैं। स्वास्तिक में चार मकान भी बनाए गए हैं। अब करीब आठ साल बाद यह स्पष्ट दिखने लगा है।
यह है मान्यता
मान्यता के अनुसार मांगलिक कार्यक्रमों के दौरान स्वास्तिक चिह्न को कुमकुम से उकेरने के साथ उसका पूजन किया जाता है। पूजन के दौरान थाली में भगवान गणेश को स्थापित करने से पहले स्वास्तिक बनाने की भी मान्यता है। स्वास्तिक को सूर्य और ऊर्जा के रूप में सकारात्मकता व मंगल का भी प्रतीक माना जाता है। घर-मंदिरों में स्वास्तिक की रोजाना पूजन की भी मान्यता है।
अमेरिका में बनी थी सबसे बड़ी आकृति
नाहटा के अनुसार दुनिया के सबसे बडे़ स्वास्तिक के रूप में अमेरिका के कोरोनाड़ो शहर में नौसेनिक हवाईअड्डा वर्ष १९६० में बनाया गया था। यह आकृति आकाश से स्पष्ट दिखाई देती थी, लेकिन इसको नाजी का लोगो मानते हुए ढंक दिया गया। इस पर छह लाख डॉलर खर्च किए गए थे। बीकानेर में बना यह स्वास्तिक भी आसमान से नजर आता है। मनमोहक दिखने वाले इस स्वास्तिक के आस पास जब हरियाली घनी हो जाएगी तो ये और ज्यादा आकर्षित दिखाई देगा।
Published on:
19 Aug 2018 09:32 am
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