एथनॉल फ्यूल के बारे कितना जानते हैं आप, जानें पेट्रोल-डीजल के इस विकल्प के फायदे और नुकसान

पेट्रोल-डीजल का विकल्प बनकर उभर रहा है एथेनॉल , लेकिन अभी भी इसके बारे में लोगों की जानकारी कम है।

Pragati Vajpai

July, 1505:23 PM

बाइक

नई दिल्ली: TVS मोटर्स ने हाल ही में देश की पहली एथेनॉल फ्यूल से चलने वाली बाइक लॉन्च की है। यानि इस बाइक में पेट्रोल-डीजल नहीं बल्कि एथेनॉल फ्यूल का इसेतमाल किया जाएगा। ऐसा दावा है कि प्रदूषण को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, क्योंकि एथनॉल को इस्तेमाल करने से पॉल्यूशन का स्तर कम हो जाएगा। लेकिन अभी भी कई लोगों को नहीं पता है कि ये किस प्रकार का फ्यूल है और इसके फायदे नुकसान क्या हैं।

इसके फायदे नुकसान जानने से पहले आपको बताते हैं कि एथनॉल आखिर होता क्या है।

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एथनॉल क्या है-

एथनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल करने के लिए पेट्रोल में मिलाया जाता है। एथनॉल वैसे तो गन्ने से बनाया जाता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों जैसे मक्का से भी इसे तैयार किया जा सकता है। इस फ्यूल से न सिर्फ पर्यावरण बल्कि खेती करने वालों को भी काफी फायदा होगा। भारत के लिहाज से देखा जाए तो एथनॉल अच्छा फ्यूल सोर्स हो सकता है, क्योंकि भारत में गन्ना एक प्रमुख फसल है और औद्योंगिक स्तर पर इसकी खेती की जाती है।

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क्यों करें एथेनॉल का इस्तेमाल-

एथनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है । इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है। ये ईंधन न सिर्फ कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है बल्कि कंवेशनल ईंधन पेट्रोल और डीजल से होने वाले खतरों से भी बचाता है। इसकेो साथ ही ये MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है। एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया। दूसरे शब्दों में कहें तो एर पॉल्यूशन को देखते हुए एथेनॉल फ्यूल हमारे देश की जरूरत है।

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एथनॉल के फायदे-

  • एथेनॉल के इस्तेमाल से गाड़ियां 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन करती है।
  • सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी एथनॉल कम करता है।
  • एथेनॉल में मौजूद 35 फीसदी ऑक्सीजन के चलते ये फ्यूल नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है।
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नुकसान-

आपको मालूम हो कि ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां एथेनॉल से चलती हैं, यही नहीं बाकी गाड़ियां भी 24 फीसदी इथेनॉल मिला ईंधन उपयोग कर रही हैं। लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल बढ़ने पर गन्ने की खेती बढ़ जाएगी और बाकी कृषि उपज के साथ बैलेंस बिगड़ जाएगा।

वहीं ब्राजील मे ये प्रयोग सक्सेस हुआ क्योंकि वहां हमसे तीनगुना जमीन है लेकिन आबादी हमारे देश के 1-2 राज्यों कि बराबर है।

Pragati Bajpai
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