
क्षेत्रीय विधायक द्वारा कई बार आश्वासन देने के बाद ध्यान नहीं दिया गया, तब एनटीपीसी के प्रभावित अपनी समस्याओं को लेकर रविवार को नगरीय प्रशासन मंत्री के पास आए, लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण जनर्दशन कैंसिल कर दिया गया। अब कलेक्टर से गुहार लगाने की तैयारी की जा रही है। सीपत एनटीपीसी प्रबंधन ने सुखरीपाली, गतौरा, दवनडीह, पंधी, जांजी, रलिया, रांक, कौडिय़ा और दर्रा गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहित की है। भू- स्थापित रेवा राम साहू ने बताया कि अधिग्रहण के दौरान प्रबंधन ने उनसे वादा किया था कि जमीन के बदले मुआवजा भी मिलेगा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी। प्रबंधन के झांसे में आकर आसपास गांव के 600 से अधिक परिवारों ने अपनी जमीन दे दी।
इनमें से करीब 300 परिवार के एक- एक सदस्य को नौकरी मिल चुकी है। शेष परिवारों को मुआवजा तो मिल गया है, लेकिन नौकरी के नाम पर एनटीसीपी प्रबंधन से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। यह सिलसिला 10 साल से चल रहा है। इन्होंने जिला प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन से अपने हक के लिए गुहार लगाई, पर कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। भू- स्थापित साहू ने बताया कि एनटीपीसी के सामने उन्होंने 8 जनवरी से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है। अब भी उन्हें आश्वासन मिल रहा है लेकिन वे किसी तरह के झांसे में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब उनकी मांग नहीं सुनी गई तो उनके पास आत्मदाह करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। विधायक लहरिया को अब हम घुमाएंगे। रेवा राम साहू ने आरोप लगाते हुए कहा कि गांव मस्तूरी विधानसभा के अंतर्गत आता है। उन्होंने मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया से संपर्क किया तो उन्होंने उन्हें जवाब दिया कि जल्द ही आता हूं। अब जब भी संपर्क करते हैं तो यही जवाब मिलता है।
Published on:
22 Jan 2018 01:17 pm
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