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भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बिलासपुर से धनबाद बॉर्डर तक बनेगी फोरलेन

नेशनल हाइवे : पहले चरण में लालखदान से उरगा तक 70 किमी. सडक़ बनेगी

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Dhanbad highway

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बिलासपुर से धनबाद बॉर्डर तक बनेगी फोरलेन

बिलासपुर. नेशनल हाइवे के रायपुर से झारखंड सीमा तक फोरलेन निर्माण के प्रस्ताव को शासन ने भारतमाला परियोजना के तहत शामिल किया है। 285 किलोमीटर लंबे इस सडक़ की लागत 4 अरब 27 करोड़ रुपए अनुमानित है।

प्रथम चरण में बिलासपुर से उरगा तक के 70 किलोमीटर लंबे सडक़ निर्माण के लिए लगभग 46 गांवों की भूमि अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रभावित किसानों और भू स्वामियों को मुआवजे की राशि का वितरण करने के बाद लालखदान से सडक़ के निर्माण का कार्य आरंभ कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने रायपुर से झारखंड सीमा तक फोरलेन सडक़ का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। शासन ने इस सडक़ को भारतमाला प्रोजेक्ट के तौर पर शामिल करते हुए इसकी मंजूरी प्रदान कर सर्वे के निर्देश दिए। शासन के निर्देशानुसार पहले चरण में बिलासपुर से उरगा तक की 70 किलोमीटर लंबे सडक़ के लिए सर्वे का कार्य पूर्ण करा लिया है।

चौदह मीटर चौड़ी बनाई जाएगी सडक़
नेशनल हाइवे अथॉरिटी द्वारा तय प्रावधान के तहत 14 मीटर चौड़े फोरलेन सडक़ का निर्माण कराया जाएगा। हर लेन की चौड़ाई 3.5 मीटर होगी।

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से धनबाद बार्डर तक फोरलेन सडक़ निर्माण के लिए प्रक्रिया की जा रही है। 285 किलोमीटर इस सडक़ के निर्माण में 4275 करोड़ का खर्च अनुमानित है। इसके बलए 3 स्मॉल केपिटल और 3 के केपिटल का प्रकाशन किया जा चुका है। अब 3 डी पब्लिकेशन की प्रकिया की जा रही है। 80 फीसदी भूमि अधिग्रहित करने के बाद निर्माण कार्य आरंभ कराया जाएगा।
रोहितेश्वर शर्मा, डायरेक्टर, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया

46 गांवों में भूमि के अधिग्रहण के लिए शुरु की जा रही प्रक्रिया
पहले चरण में बिलासपुर से लेकर उरगा (कोरबा) तक 70 किलोमीटर लंबी सडक़ का निर्माण कार्य कराया जाएगा। इस 70 किलोमीटर के दायरे के 46-47 गांवों के किसानों की सडक़ के दायरे में आ रही भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया की जाएगी। नेशनल हाइवे अथॉरिटी एक्ट के तहत अभी तक भूमिअधिग्रहण के लिए तीन स्तर की प्रक्रिया की जा चुकी है।

80 फीसदी जमीन को अधिग्रहित करने के बाद शुरू होगा काम
तय प्रावधान के तहत भूमिअधिग्रहण की प्रक्रिया के बाद प्रभावित किसानों को उनके अधिग्रहित भूमि के मुआवजे का वितरण किया जाएगा। इसके लिए 80 फीसदी भूमि अधिग्रहित करने के बाद निर्माण का कार्य आरंभ कराया जाएगा।

गवर्नमेंट रेट से दोगुनी राशि का किया जाएगा भुगतान
नेशनल हाईवे अर्थारिटी द्वारा किसानों को मुआवजे का वितरण शासकीय दर के हिसाब से किया जाएगा जो इस लागत में शामिल नहीं है। तय प्रावधान के मुताबिक प्रभावितों को उनकी भूमि का सरकारी दर के हिसाब से दुगनी राशि का भुगतान किया जाएगा।

तीन चरणों में होगा निर्माण
तय कार्ययोजना के तहत पहले चरण में बिलासपुर से उरगा तक 70 किलोमीटर में 15 करोड़ प्रतिकिलोमीटर के हिसाब से 1050 करोड़ की लागत तय की गई है। दूसरे चरण में उरगा से पत्थलगांव तक 85 किलोमीटर तक सडक़ निर्माण में 1275 करोड़ और तीसरे चरण में प्रस्तावित पत्थल गांव से कुनकुरी के आगे धनबाद बार्डर तक 130 किलोमीटर सडक़ के निर्माण में 1950 करोड़ की लागत अनुमानित है। ये अनुमानित एस्टीमेट निर्माण कार्य के लिए है । इसमें भूअधिग्रहण के मुआवजे की राशि शामिल नहीं है।

यहां से गुजरेगी सडक़
बिलासपुर लालखदान से होते हुए यह फोरलेन सडक़ उरगा, पत्थलगांव, कुनकुरी से होते हुए झारखंड बार्डर तक जाएगी। इसके आगे की सडक़ का कार्य झारखंड शासन द्वारा कराया जा रहा है।