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2 साल पहले भेजे 7 के प्रस्ताव, बयान नहीं होने की वजह से अटका जिलाबदर

दिसंबर 2016 में शहर के 4 थानों से निगरानी बदमाशों की सूची भेजी गई

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बिलासपुर . शहर के 4 थानों के निगरानी बदमाशों के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई का प्रस्ताव कलेक्टोरेट भेजने के बाद पुलिस भू गई। बयान दर्ज नहीं होने से सारे प्रस्ताव पेंडिंग हैं। दिसंबर 2016 में तत्कालीन एसपी अभिषेक पाठक ने निगरानी बदमाशों की सूची तैयारी करने के बाद प्रस्ताव भेजे थे। पुराने प्रस्तावों पर बयान नहीं होने से पुलिस नए प्रस्ताव भेजने में रुचि नहीं ले रही है। जिले में पिछले 2 साल से निगरानी बदमाशों के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई नहीं हुई है। तत्कालीन एसपी अभिषेक पाठक ने दिसंबर 2016 में शहर के थानों में निगरानी बदमाशों की सूची और उनके प्रकरणों की जांच कराई थी। शहर के 4 थाने तोरवा, सरकण्डा, सिविल लाइन और तारबाहर थाना क्षेत्र के 7 निगरानी बदमाशों के प्रस्ताव कलेक्टोरेटे भेजे गए थे। जिला बदर के प्रस्तावों पर कलेक्टोरेट में सुनवाई शुरू हुई थी। सभी प्रकरणों में पुलिस अधिकारियों, थानेदारो और गवाहों के बयान दर्ज किए जाने थे। पुलिस अधिकारियों ने खुद और गवाहों के बयान दर्ज कराने कलेक्टोरेट जाने में रूचि नहीं दिखाई। प्रकरण कलेक्टोरेट में पेंडिंग हो गए हैं। नए प्रस्ताव बनाए, लेकिन भेजने में छूट रहे पसीने: पुलिस ने जिले के 7 थानों के एक दर्जन से अधिक निगरानी बदमाशों के जिला बदर के प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावों में हिस्ट्रीशीटरों के आपराधिक रिकार्ड भी शामिल किए गए हैं। पुराने प्रस्तावों पर बयान नहीं होने के कारण नए प्रस्ताव कलेक्टोरेट भेजने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।

200 से पार है निगरानी व गुंडा बदमाशों की संख्या : जिले के 20 थानों में गुंडे और निगरानी बदमाशों की संख्या 200 से पार है। मारपीट के 5 मामलों में चालान होने वाले अपराधियों को गुण्डा और संपत्ति संबंधि अपराध के 3 मामलों में चालन होने वाले अपराधियों को पुलिस निगरानी बदमाशों की सूची में रखा है। गुंडे और निगरानी बदमाशों की निगरानी करने में भी पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।

राजनीतिक दबाव में अटके प्रस्ताव : पुलिस ने जिन निगरानी बदमाशों के जिला बदर प्रस्ताव भेजे हैं, वे राजनीति दलों की सदस्यता लेकर कार्रवाई रुकवाने के भरसक प्रयास में हैं। राजनीतिक दबाव में पुलिस प्रस्तावों में बयान नहीं करा पा रही है।

चुनाव के पहले होनी है जिला बदर की कार्रवाई : चुनाव के पहले पुलिस निगरानी बदमाशों के जिलाबदर के प्रस्ताव भेजती है। वर्ष 2012 में पुलिस ने जिला बदर के 8 प्रस्ताव भेजे थे, जिनमें से 5 अपराधियों के खिलाफ जिलाबदर के आदेश जारी हुए थे। विधानसभा चुनाव 2018 के पहले पुलिस ने फिर से जिला बदर के प्रस्ताव बनाया है।

रिकार्ड अपडेट नहीं, हवाला देने में चूक रही पुलिस: पुलिस के रिकार्ड अपडेट नहीं है। जिले में कई निगरानी बदमाश ऐसे भी हैं, जिन्हें कोर्ट से सजा मिल चुकी है। लेकिन अपराधियों के सजा संबंधी दस्तावेज पुलिस के पास नहीं है। जिलाबदर की कार्रवाई के लिए कोर्ट से किसी मामले में निगरानी बदमाश के खिलाफ सजा का आदेश होना जरूरी है। पुलिस अपने रिकार्ड दुरुस्त करने में लगी है।