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36 साल पुराने पेड़ कटाई घोटाले के आरोपी दोषमुक्त, HC ने कहा- सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता

CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने 36 साल पुराने बस्तर पेड़ कटाई घोटाले में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस रजनी दुबे ने सीबीआई कोर्ट रायपुर के फैसले को पलटते हुए दोषसिद्धि न होने पर दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर सजा निरस्त कर दी।

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हाईकोर्ट (photo Patrika)

हाईकोर्ट (photo Patrika)

CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने 36 साल पुराने बस्तर पेड़ कटाई घोटाले में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस रजनी दुबे ने सीबीआई कोर्ट रायपुर के फैसले को पलटते हुए दोषसिद्धि न होने पर दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर सजा निरस्त कर दी।

मामला वर्ष 1989 में कोंडागांव वन क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ा है। आरोप था कि कलेक्टर कोर्ट के आदेश में 150 की जगह 250 पेड़ों की अनुमति दिखाकर घोटाला किया गया। तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर ने 150 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी थी।

सीबीआई कोर्ट ने दी थी तीन साल की सजा

रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने 2010 में दोनों आरोपियों को साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ शक या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

आरोप साबित नहीं

अपने फैसले में जस्टिस रजनी दुबे ने माना कि हस्ताक्षर विशेषज्ञ की रिपोर्ट अधूरी थी। कलेक्टर खुद स्वीकार चुके हैं कि आदेश में नीली स्याही से लिखे शब्द उन्हीं के हैं, और सारे पैसे सरकारी खाते में जमा थे। किसी आरोपी को कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका, इसलिए दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है। वीरेंद्र नेताम को छह माह के लिए 25 हजार रुपए का व्यक्तिगत बांड भरने का निर्देश दिया गया है।

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