
बिलासपुर . अब राइस मिलर्स को पर्यावरण संरक्षण मंडल से एनओसी लेना अनिवार्य है। इसके लिए उन्हें इस आशय का सहमति पत्र देना होगा, कि वे जल और वायु प्रदूषित नहीं करेंगे। इसके लिए मिल की लागत के अनुरूप ऑनलाइन आवेदन के साथ शुल्क देना पडेग़ा। यदि प्रदूषण फैलाया तो मिल संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों को उत्पाद व उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले प्रदूषण के आधार पर चार श्रेणियों (लाल, नारंगी, हरा एवं सफेद) में वर्गीकृत किया है। इसी के तहत यह निर्देश जारी किए गए हैं। बिलासपुर जिले में 144 राइस मिले हैं। इनमें 14 उसना चावल का निर्माण करती हैं। वहीं एक सौ राइस मिलें अरवा चावल बनाती हैं। उसना चावल बनाने वाले सभी 14 राइस मिल पहले ही छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जल एवं वायु प्रदूषण नहीं फैलाने की शर्त पर एनओसी प्राप्त कर चुके हैं। जबकि अरवा चावल प्रोसेसिंग करने वाले मिलरों ने यह एनओसी नहीं ली है।
Published on:
07 Mar 2018 11:36 am
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