
हाईकोर्ट ने पूरी कार्रवाई को माना फर्जी (photo source- Patrika)
Chhattisgarh High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई के दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए भिलाई, कुम्हारी सहित सभी दर्ज आपराधिक मामलों की कार्यवाही रद्द कर दी है। मामला 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज आठ आपराधिक मामलों से संबंधित है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सभी मामलों को फर्जी करार दिया था।
डिवीजन बेंच ने माना कि इन परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। याचिकाकर्ताओं को अन्य राहतों के लिए उचित मंच के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी गई है।
मामला वर्ष 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए आठ आपराधिक मामलों की श्रृंखला का हिस्सा था। कई मामलों में लगभग उन्हीं परिवारजनों को आरोपी बनाया गया। बाद के मामलों के शिकायतकर्ता पहले के शिकायतकर्ताओं से जुड़े बताए गए। याचिकाकर्ताओं को जेल से गिरफ्तार दिखाया गया था। पुलिस की एसआईटी ने जांच के बाद आठों अपराधों को फर्जी बताया। इसी मामले में जांच अधिकारी की लापरवाही भी एसआईटी ने दर्ज की। जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश हुए।
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, परिवार की एक महिला का पीयूष तिवारी नामक व्यक्ति से संपर्क हुआ। आरोप था कि उसने स्वयं को अविवाहित पुलिस अधिकारी बताया और विवाह का भरोसा दिया। बाद में उसके पहले से विवाहित होने की जानकारी मिलने पर महिला ने संबंध समाप्त कर लिया और 5 अप्रैल 2018 को आर्य संस्कार केंद्र, बिलासपुर में विवाह कर लिया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि इसके बाद भी पीयूष तिवारी ने संबंध बनाए रखने का दबाव बनाया और निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी दी। इसके बाद महिला, उसके पति और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग थानों और जिलों में आपराधिक मामले दर्ज होते चले गए।
Updated on:
27 Aug 2026 02:33 pm
Published on:
27 Aug 2026 02:33 pm
