5 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Bilaspur High Court: साइबर ठगी केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिना ट्रांजिट रिमांड गिरफ्तारी रद्द, जानें पूरा मामला

Transit Remand: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को दूसरे राज्य से बिना ट्रांजिट रिमांड के लाना कानून और संविधान के अनुरूप नहीं है।
2 min read
Google source verification
Chhattisgarh High Court

हाईकोर्ट (photo source- Patrika)

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि पुलिस किसी व्यक्ति को दूसरे राज्य से पकडक़र बिना ट्रांजिट रिमांड के नहीं ला सकती। साइबर ठगी के आरोपी की हिरासत को हाईकोर्ट ने गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ माना है। साइबर ठगी के एक मामले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उक्त फैसला दिया।

कोर्ट ने इस आधार पर साइबर ठगी के आरोपी जितेश आनंद उर्फ जीतू की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की 28 जून से 30 जून 2026 तक की हिरासत को गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ पाकर अंबिकापुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के 30 जून और तीन जुलाई 2026 के रिमांड आदेश भी निरस्त कर दिए। आरोपी जितेश को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतों पर रिहा करने का निर्देश दिया गया है।

Cyber Fraud Case: शेयर बाजार में मुनाफे के नाम 21 लाख से ज्यादा की ठगी

यह मामला साइबर थाना, सरगुजा रेंज में दर्ज अपराध से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ शेयर बाजार में अधिक पैसा दिलाने का झांसा देकर 21 लाख 15 हजार रुपये की ठगी की शिकायत की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत अपराध दर्ज किया था। पुलिस की ओर से तर्क दिया गया था कि जितेश अपनी मर्जी से छत्तीसगढ़ आया, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।

गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घण्टे में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना जरूरी

संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(2) का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है। पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड नहीं लिया, जिससे उसकी हिरासत कानून के अनुरूप नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि अवैध हिरासत पर बाद का रिमांड भी नहीं टिक सकता। जितेश 28 जून की शाम से पुलिस के नियंत्रण में था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी व्यक्ति की आजादी रोक दी जाती है, तभी गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा प्रावधान लागू होते हैं।