
हाईकोर्ट (photo-patrika)
CG High Court: हाईकोर्ट स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ में न्यायिक परंपरा, लगातार समृद्ध हुई। यहां प्रैक्टिस कर रहे लगभग 16 स्थानीय वकील जज बने। 2018 में पहली बार एक साथ दो महिला जजों की नियुक्ति हुई। इससे वकील और जज के तौर पर कैरियर बनाने के लिए बिलासपुर क्षेत्र सहित प्रदेश के युवाओं और महिलाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
बिलासपुर में हाईकोर्ट स्थापना से क्षेत्र और प्रदेश के लोगों को न्याय के क्षेत्र में राहत मिल रही, वहीं न्यायिक क्षेत्र में कैरियर बनाने में भी मदद मिल रही है। हाईकोर्ट की स्थापना के बाद पिछले 25 साल में वकालत में कैरियर बनाने के प्रति युवाओं में रुझान बढा है। इसके पहले जबलपुर आने जाने में समय लगने के कारण गिने-चुने वकील ही हाईकोर्ट की वकालत कर रहे थे। हाईकोर्ट स्थापना के प्रदेश में निजी और सरकारी लॉ कॉलेजों की संया और उसी अनुपात में लॉ करने वालों की संख्या बढ़ रही है।
स्टेट बार काउंसिल से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में वकीलों की संख्या 35 हजार से ज्यादा है। इनमें महिला वकीलों की संख्या लगभग 10 हजार है। इसके अलावा भी हर साल बड़ी संख्या में छात्राएं लॉ में एडमिशन ले रहीं हैं। वर्ष 2018 में यहां पर चार जजों की एक साथ नियुक्ति हुई। इनमें जस्टिस विमला सिंह कपूर और जस्टिस रजनी दुबे पहली बार महिला जज बनीं। इनमें जस्टिस विमला कपूर रिटायर हो चुकी हैं, जबकि जस्टिस रजनी दुबे अभी कार्यरत हैं।
हाईकोर्ट में मामले प्रस्तुत करने और न्याय दिलाने में स्थानीय वकीलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2003 तक यहां पर अन्य प्रदेशों से ही जज पदस्थ किए गए। लेकिन 2004 से स्थिति बदली। इस वर्ष वकील कोटे से जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा और वकील कोटे से जस्टिस विजय कुमार श्रीवास्तव जज बने। इसके बाद लगातार स्थानीय वकील जज बनते गए।
इनमें जस्टिस सुनील सिन्हा, एनके अग्रवाल, प्रीतिंकर दिवाकर, प्रशांत मिश्रा, मनींद्र मोहन श्रीवास्तव, पी सैम कोशी, गौतम भादुड़ी, संजय के.अग्रवाल, संजय अग्रवाल, पीपी साहू, एनके व्यास, सचिन सिंह राजपूत, राकेश मोहन पांडे, बीडी गुरु और जस्टिस एके प्रसाद शामिल हैं। इनमें से जस्टिस प्रशांत मिश्रा सुप्रीम कोर्ट में जज हैं। इसके अलावा बड़ी संया में प्रदेश के जिला न्यायालयों से भी हाईकोर्ट में जज नियुक्त किए गए हैं।
Updated on:
31 Oct 2025 11:56 am
Published on:
31 Oct 2025 11:56 am
