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बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला! 14 FIR दर्ज, फर्जी मामलों के जरिए लाखों की हेराफेरी का आरोप

Snake Bite Compensation Fraud: बिलासपुर में कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले पर प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में चार थानों में 14 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
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Bilaspur Snake Bite Scam

Bilaspur Snake Bite Scam: बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला(photo-patrika)

Bilaspur Snake Bite Scam: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में शहर के चार अलग-अलग थानों में कुल 14 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। संवेदनशील प्रकरण होने के कारण इन मामलों की जानकारी सिटीजन पोर्टल पर सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं, इस कार्रवाई के बाद कई तहसीलदारों और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

यह मामला उस समय सामने आया जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में बिलासपुर जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि जिले में सर्पदंश से मौतों की संख्या जशपुर जैसे जिले से भी अधिक दर्ज की गई है। इसके बाद शासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।

Chhattisgarh Snake Bite Compensation Scam: चार थानों में दर्ज हुई एफआईआर

शुरुआती दौर में जांच की रफ्तार धीमी रही, लेकिन शासन के निर्देश के बाद प्रक्रिया तेज की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर बिलासपुर तहसीलदार प्रकाश साहू की जांच के बाद कोनी, सरकंडा, कोतवाली और तोरवा थाना क्षेत्रों में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से अभी तक एफआईआर से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा लेने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, मामले में आरोप है कि एक संगठित तरीके से फर्जी सर्पदंश मामलों को तैयार कर प्राकृतिक आपदा राहत राशि का लाभ लिया गया। जांच में पटवारी प्रतिवेदन, पुलिस मर्ग रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। नियमों के अनुसार सर्पदंश से मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर वित्तीय अनियमितता की गई।

जांच के घेरे में कई नाम

प्राकृतिक आपदा राहत राशि स्वीकृत करने की प्रक्रिया में पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर स्तर तक दस्तावेजों की जांच होती है। ऐसे में बड़े स्तर पर कथित फर्जीवाड़े के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान कुछ पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के नाम भी चर्चा में आए हैं।

इनमें मुकेश देवांगन, शेषनारायण जायसवाल, अतुल वैष्णव, गरिमा ठाकुर और प्रकृति ध्रुव के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि अभी किसी के खिलाफ आधिकारिक रूप से आरोप तय नहीं किए गए हैं।

पुलिस जांच जारी

प्रशासन और पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े के नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आ सकेगी। फिलहाल सभी संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। मामले में आगे भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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