
पहले प्रकृति वंदन, फिर रक्षा बंधन (Photo- Patrika)
Raksha Bandhan 2025: भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन यदि पेड़ पौधों रक्षा का पर्व बन जाए तो प्रकृति भी खिल उठती है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अरपा अर्पण महाभियान समिति ने रक्षाबंधन को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की ऐसी ही अनूठी और अनुकरणीय मिसाल पेश की है।
पिछले आठ साल से ‘पहले प्रकृति वंदन फिर रक्षा बंधन’ मिशन के तहत समिति के सदस्य अब तक 28000 से ज्यादा पौधे लगाकर उनकी रक्षा का संकल्प ले चुके हैं। अरपा नदी के किनारे लगाए गए ये पौधे अब वृक्ष बन चुके हैं। समिति के 220 सक्रिय सदस्यों ने न केवल पौधे लगाए, बल्कि देखभाल भी करते हैं।
मंडला जिले की अनोखी गौंडी कला कलाई पर नजर आएगी। नैनपुर और मंडला विकासखंड की स्वयं सहायता समूह की 52 महिलाएं गौंडी चित्रकारी कर ऊन, मोती, गोटा पत्ती और अन्य सजावटी सामग्री से राखियां बना रही हैं। इन राखियों की कीमत 25 से 100 रुपए तक है। इसके लिए गिफ्ट पैक भी तैयार किया गया है, जिसमें दो गौंडी राखियां, दो गौंडी पेंटिंग वाले रूमाल, आंवला कैंडी और दो आंवला के लड्डू हैं।
रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहनों का ही नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेने का दिन है। इसलिए हम इस दिन पेड़ को राखी बांधने के बाद उसे हरित भाई बनाकर हरियाली की डोर को मजबूत करते हैं। -श्याम मोहन दुबे, समिति के संरक्षक
Updated on:
09 Aug 2025 11:53 am
Published on:
09 Aug 2025 11:53 am
