एनजीटी ने राष्ट्रीय स्तर पर फरमान जारी करते हुए नगरीय निकाय क्षेत्रों में स्थित नदियों में दूषित जल नहीं छोडऩे के आदेश जारी किए थे। आदेश में कहा गया था कि नालियों से निकालने वाले दूषित जल को पहले एसटीपी यानि सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांट के माध्यम से ट्रिटमेंट यानि उपचारित किया जाएगा और इसके बाद ही जल को नदी में छोड़ा जाएगा। आदेश जारी हुए 2 वर्ष से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन नगर निगम बिलासपुर में इस आदेश का आज तक पालन नहीं हुआ है। नगर निगम ने अब तक एक भी एसटीपी प्लांट नहीं लगाया है। लोगों के घरों से निकलने वाला दूषित जल नालियों के माध्यम से नदी में सीधे छोड़ा जा रहा है।
पूरे शहर के भीतर नदी में गंदगी-ही गंदगी
पूरे शहर के भीतर नदी गंदगी से पट गई है। पुल के उपर से कचरा फेंकने के साथ -साथ नालियों में बहने वाला दूषित जल भी नदी में जमा हो रहा है। शहर के मंगला, कुदुदंड, तिलक नगर, डबरीपारा, गोड़पारा, जूना बिलासपुर,दयालबंद, तोरवा और देवरी खुर्द नदी किनारे करीब 40 से अधिक नाली और नालों से पानी नदी में जा रहा है। इसी तरह कोनी, लोधीपारा, पुराना सरकंडा, जबड़ापारा, चांटीडीह, चिंगराजपारा, लिंगियाडीह मोपका और चिल्हाटी नदी किनारे से नदी में 30 से अधिक नाले और नालियों से पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे पूरी नदी गंदे पानी से पट गई है।
मंगला और कोनी के एसटीपी प्लांट भी अधूरे
नदी किनारे सडक़ बनाने की योजना पर वर्तमान में लगातार काम जारी है। अरपा उत्थान तट संवर्धन योजना और इंदिरा सेतु से मंगला व कोनी तक सउक़ निर्माण कार्य भी होने हैं। नदी में दूषिज जल छोडऩें से पहले उसे उपचारित करने के लिए निगम ने मंगला में 2 और कोनी में 1 एसटीपी प्लांटी का निर्माण कार्य एक वर्ष पूर्व शुरू कराया था। दोनो एसटीपी प्लांट जहां बनाए जाने थे वहां अतिक्रमण होने के कारण कई महीनों से काम शुरू नहीं हुआ था। वर्तमान में प्लांट का 30 फीसदी भी काम नहीं हुआ है।
भूजल पर भी पड़ रहा प्रभाव
सूत्रों के अनुसार शहर का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, इसे दुरूस्त रखने के लिए राज्य शासन ने अरपा नद पर दो बैराज बनवा रही है। इससे जलस्तर बचाने के दावे किए गए है। इसे स्पष्ट है कि नदी में पानी रहने पर जल स्तर पर असर पड़ता है। यदि नदी में दूषित जल का बहार और भंडारण 12 महीने रहेगा तो इसका असर भूजल पर भी पड़ेगा। यानि दूषित जल के भंडारण से भूजल स्तर भी दूषित हो जाएगा।