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Census 2027: बंद घर, सुरक्षा गार्ड और अपार्टमेंट कल्चर से जूझ रही जनगणना टीम, ग्रामीण क्षेत्रों में काम आसान

Census 2027: शहरी क्षेत्रों की एक बड़ी समस्या अनियोजित कॉलोनियां और घर हैं, जहां घरों का कोई स्पष्ट क्रम या नंबरिंग नहीं है। संकरी गलियों और भीड़भाड़ के कारण प्रगणकों को सही घर ढूंढने और उसकी लोकेशन दर्ज करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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जनगणना 2027 (photo-patrika)

जनगणना 2027 (photo-patrika)

Census 2027: बिलासपुर समेत अधिकांश शहरी क्षेत्रों में जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और आवास गणना के दौरान प्रगणकों को कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहरों में बड़ी संख्या में लोग नौकरी या अन्य कारणों से दिनभर घर से बाहर रहते हैं, जिससे सर्वे टीम को बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। इसके अलावा, कई अपार्टमेंट और गेटेड सोसायटियों में सुरक्षा गार्ड सर्वेक्षण टीम को अंदर जाने के लिए अनुमति लेने में समय लग रहा, जिससे काम की गति प्रभावित हो
रही है।

गली-मोहल्लों में घर ढूंढना चुनौती, अनियोजित घरों व कॉलोनियों ने बढ़ाई परेशानी

शहरी क्षेत्रों की एक बड़ी समस्या अनियोजित कॉलोनियां और घर हैं, जहां घरों का कोई स्पष्ट क्रम या नंबरिंग नहीं है। संकरी गलियों और भीड़भाड़ के कारण प्रगणकों को सही घर ढूंढने और उसकी लोकेशन दर्ज करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। शहर में ही कई ऐसी कॉलोनियां और अपार्टमेंट हैं, जहां लोग अपने पड़ोसियों तक का नाम और विवरण नहीं जानते। ऐसे में परिवार की सटीक जानकारी जुटाना और सत्यापन करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सहयोग, सर्वे कार्य आसान

इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना कार्य अपेक्षाकृत सरल और तेज गति से चल रहा है। गांवों में लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं, घरों की पहचान स्पष्ट होती है और स्थानीय स्तर पर जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। स्थानीय सामाजिक जुड़ाव के कारण प्रगणकों को घर ढूंढने, परिवार की जानकारी लेने और सत्यापन करने में ज्यादा समय नहीं लगता।

स्व-गणना को लेकर भी जागरूकता की कमी

सरकार द्वारा मोबाइल के माध्यम से स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया है, लेकिन लोगों में इसे लेकर उतनी जागरूकता नहीं दिखाई गई। कई लोग तकनीकी जानकारी के अभाव या उदासीनता के कारण स्वयं जानकारी भरने से बच रहे हैं, जिससे प्रगणकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। जबकि यह काम आसानी से मोबाइल के जरिए किया जा सकता था, जिससे सभी का काम और आसान हो जाता।

ताले लगे घर और दोबारा सर्वे की मजबूरी

शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घरों में ताले लगे मिलने से भी टीम को दिक्कत हो रही है। कामकाजी लोगों के बाहर रहने के कारण प्रगणकों को उन्हीं घरों में दोबारा जाना पड़ रहा है, जिससे समय और संसाधन दोनों की खपत बढ़ रही है। यह स्थिति केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी शहरी क्षेत्रों में जनगणना टीमों को इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सटीक आंकड़े जुटाने में लगी टीम

इसके बावजूद प्रगणक लगातार प्रयास कर रहे हैं और घर-घर पहुंचकर सटीक आंकड़े जुटाने में लगे हुए हैं, ताकि आने वाले समय में सरकार को योजनाएं बनाने के लिए सही और भरोसेमंद डेटा उपलब्ध हो सके। प्रशासन लगातार अपील भी कर रही कि, जनगणना में लगे कर्मचारियों का सहयोग करें और उन्हे सही जानकारी उपलब्ध कराएं।