12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG News: कैंपस में हॉस्टल सुविधा का अभाव, बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं को दिक्कत

CG News: बिलासपुर जिले में नैक से ए++ की मान्यता प्राप्त गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (जीजीयू) में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को अब भी हॉस्टल सुविधा का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है।

2 min read
Google source verification
CG News: कैंपस में हॉस्टल सुविधा का अभाव, बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं को दिक्कत(photo-patrika)

CG News: कैंपस में हॉस्टल सुविधा का अभाव, बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं को दिक्कत(photo-patrika)

CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नैक से ए++ की मान्यता प्राप्त गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (जीजीयू) में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को अब भी हॉस्टल सुविधा का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय के 32 शिक्षण विभागों में हर साल लगभग 11 हजार छात्र एडमिशन लेते हैं, लेकिन कैंपस के भीतर केवल 10 हॉस्टल हैं, जिनमें 1608 छात्रों के लिए ही सीटें उपलब्ध हैं।

CG News: कैंपस में नहीं है रहने की सुविधा

इस कारण महज 10 से 15 प्रतिशत छात्रों को ही यूनिवर्सिटी हॉस्टल में जगह मिल पाती है, जबकि शेष 80-85 प्रतिशत छात्रों को बाहर रहना पड़ता है। हॉस्टल सीटों की भारी कमी के कारण अधिकांश छात्रों को कोनी और सरकंडा क्षेत्र में किराए पर पीजी रूम लेने पड़ते हैं, जहां 3000 से 4000 रुपए मासिक किराया देना पड़ता है।

जबकि विश्वविद्यालय के हॉस्टल में मात्र 1000 रुपए में रहने की सुविधा उपलब्ध होती है। इस स्थिति से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के जिलों एवं प्रदेशों से आने वाले छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

विवि में रहे तो 5, बाहर तो 10 हजार खर्च

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत कुछ छात्रों ने बताया कि यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की तो 1000 रुपए हॉस्टल और 3000 से 4000 रुपए खाने के खर्च होते हैं, यानी 5000 रुपए प्रतिमाह के खर्च में पढ़ाई हो जाती है। जबकि कैंपस के बाहर पीजी रूम लिया तो 3000 से 3500 रुपए रूम किराया और 7000 रुपए तक खाने का खर्च मिलाकर हर माह 10 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ता है। जबकि यूनिवर्सिटी कैंपस के हॉस्टल में सुरक्षा अधिक होती है, इंटरनेट भी मिल जाती है, पीजी रूम में ये सुविधा नहीं मिलती।

विश्वविद्यालय के हॉस्टल में वर्तमान में छात्र-छात्राओं को मिलाकर कुल 1608 सीटों की क्षमता है, जिनमें अब तक 1212 सीटों पर प्रवेश हो चुका है। स्नातकोत्तर प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है। 250-250 सीटों वाले दो नए छात्रावासों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जिन्हें 30 अगस्त तक शुरू करने की उमीद है।

हॉस्टल में सीट बढ़ाने पर ध्यान नहीं

जीजीयू में पढ़ाई करने वाले करीब 80 प्रतिशत छात्र दूसरे प्रदेशों और जिलों से आते हैं। इन छात्रों को सुरक्षित और सस्ते आवास की अपेक्षा विश्वविद्यालय से होती है, लेकिन प्रबंधन की प्राथमिकताओं में हॉस्टल निर्माण पीछे छूट गया है। छात्रों का कहना है कि प्रतिवर्ष हॉस्टल सीटों से 10-15 गुना अधिक आवेदन आने के बावजूद प्रबंधन हॉस्टल में सीट बढ़ाने के लिए ध्यान नहीं देती है। ऐसे में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सीटों के अनुरूप हॉस्टल निर्माण की जरूरत

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में सीटों के अनुरूप हॉस्टल निर्माण की जरूरत है, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन करोड़ों रुपए खर्च कर नया प्रशासनिक भवन व अन्य विभागों के भवनों का उन्नयन कराने में जुटा हुआ है। यहां पढ़ाई करने वाले छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय वास्तव में ए++ ग्रेड के मानकों को बनाए रखना चाहता है तो सबसे पहले उसे छात्र-छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी होगी।