
CG News: बिलासपुर हाईकोर्ट ने पत्रिका में प्रकाशित 3 खबरों पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा, जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास सचिव को इस संदर्भ में व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा- यह बताएं कि अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उपरोक्त समाचार रिपोर्ट और तस्वीरें अधिकारियों के सुस्त और अकर्मण्य रवैये का प्रमाण हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी 2025 को रखी गई है।
उल्लेखनीय है कि दैनिक समाचार पत्र, पत्रिका रायपुर के अंक में 31 जनवरी 2025 को तीन खबरों में अव्यवस्था को एक्सपोज किया गया है। पहली खबर का शीर्षक है "देखरेख के अभाव में गांधी शिशु उद्यान होता जा रहा बदहाल''। समाचार रिपोर्ट में कहा गया है कि गांधी बाल उद्यान बच्चों के खेलने के लिए बनाया गया है। बगीचे की हालत बेहद खराब है। यहां लगी एक्सरसाइज मशीन खराब हो गई हैं या टूट गईं हैं, जिससे लोग व्यायाम नहीं कर पा रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए लगे झूले भी टूट गए हैं। रखरखाव के अभाव में यह उद्यान बदहाल दिखता है। कोर्ट ने कहा है कि समाचार रिपोर्ट के साथ पांच तस्वीरें भी प्रकाशित की गईं हैं।
दूसरी खबर का शीर्षक है "मोवा अंडर ब्रिज में गंदगी का आलम, राहगीर हो रहे परेशान"। कोर्ट ने कहा- यह बताता है कि राजधानी में मोवा अंडर ब्रिज की हालत खराब है। गंदा पानी यहीं जमा होता है। सड़क पर पानी फैला रहता है। यहां से गुजरने वाले वाहन इससे जुड़े नाले में फंस जाते हैं। इस कारण यहां जाम की स्थिति भी बन जाती है।
किनारों पर कूड़ा जमा होने लगा है। वर्तमान में यहां गंदगी और अंधेरा है। हाल ही में, मोवा के रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत की गई, लेकिन अंडरब्रिज को नजरअंदाज कर दिया गया है। इस कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। समाचार के साथ दो फोटो भी प्रकाशित किए गए हैं, जिससे अंडर ब्रिज में पानी के जमाव का पता चल रहा है।
कोर्ट ने उल्लेख किया कि तीसरी खबर बिरगांव नगर निगम क्षेत्र की है। इसका शीर्षक है-"गुमटी बनाकर शासकीय जमीन पर कब्जा नाले पर अतिक्रमण, यातायात बाधित और आसामाजिक तत्वों का जमावड़ा''। इस समाचार रिपोर्ट के अनुसार, अतिक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग सरकारी जमीन पर कब्जा कर खोखे लगा रहे हैं। इससे न सिर्फ यातायात प्रभावित हो रहा, बल्कि असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी बढ़ा है। नाले के आसपास तार की बाड़ को तोड़कर और दीवार को ध्वस्त करके गुमटी लगाई गई है।
सड़क के दोनों ओर सरकार की ओर से पौधरोपण कराया गया है। इसके रख-रखाव पर हर वर्ष लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों के कारण पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इस क्षेत्र में लोग नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों और संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया है। नगर निगम, सीएसआईडीसी और उरला थाना पुलिस से कई बार शिकायत की गई। लेकिन मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त ने आश्वासन दिया कि नगर निगम की टीम दौरा करेगी और मौके का निरीक्षण कर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
मामले में अतिरिक्त महाधिवक्ता वाईएस. ठाकुर और विवेक शर्मा ने कोर्ट को बताया कि यहां से गंदगी हटाने का काम किया जा रहा है। अंडरब्रिज का काम शुरू हो चुका है। उन्होंने आगे की और कार्रवाई के लिए कुछ समय मांगा। अतिक्रमण के मुद्दे पर बीरगांव निगम की ओर से उपस्थित वकील ने कहा कि अवैध कब्जा करने वालों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद हटाने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भी कार्रवाई के लिए कुछ समय मांगा। कोर्ट ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते कहा कि उन्होंने जीवन भर, स्वतंत्रता के अलावा स्वच्छता के लिए भी संघर्ष किया। उन्होंने कहा था कि "स्वच्छता स्वतंत्रता से भी महत्वपूर्ण है"।
Published on:
05 Feb 2025 05:44 pm
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