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धनतेरस की खरीदी को पूरा शहर बाजार में उमड़ा, देर रात तक होती रही खरीदारी

जानकारी के अनुसार करीब 15 करोड़ के सोने-चांदी और हीरे के आभूषण एवं सिक्कों की बिक्री हुई।

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Dhantersh

बिलासपुर. धनतेरस की खरीदी को पूरा शहर बाजार में उमड गया, देर रात तक लोग बाजार में डटे रहे और जमकर खरीदी की। भीड़ का आलम ये था कि शाम 6 बजे से लेकर देर रात 12 बजे तक तिल रखने की जगह नहीं थी। शहर के प्रमुख गोलबाजार, सदरबाजार, तेलीपारा, बुधवार बाजार, राजकिशोर नगर, तिफरा, अग्रसेन चौक, मुंगेली नाका, 36 माल एवं मैग्रेटो माल में जर्बदस्त भीड़ रही। प्रमुख रुप से सराफा, ऑटोमोबाइल, कांसे, पीतल, स्टील के बरतनों, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों, रेडीमेड कपड़े तथा पटाखा दुकानों में भीड लगी रही। बाजार के जानकारों के अनुसार 70 करोड़ से अधिक का व्यवसाय हुआ। सुख-शांति और समृद्धि के लिए धनतेरस पर लोग गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा को घर लाते हैं तथा दीवाली के दिन विधि विधान से पूजा कर ऐश्वर्य की उपासना करते हैं। रिवाज के अनुसार इस दिन खरीदारी को अत्यंत शुभ माना गया है। धनतेरस के दिन सबसे अधिक मांग गाडिय़ों की रही। लोगों ने पहले ही कारों की एडवांस बुकिंग करा ली थी। मंगलवार को 3 सौ कारों की डिलीवरी की गई। दो पहिया वाहनों की बिक्री भी 8 सौ के करीब रही। वहीं सराफा बाजार भी पीछे नहीं रहा। जानकारी के अनुसार करीब 15 करोड़ के सोने-चांदी और हीरे के आभूषण एवं सिक्कों की बिक्री हुई। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी पीछे नहीं रहा। देर रात तक मिली जानकारी के अनुसार 10 करोड़ से अधिक का व्यवसाय हुआ।

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3 सौ कारें व 8 सौ दो पहिया वाहन एक दिन में बिके : धनतेरस के दिन 3 सौ कारों की डिलीवरी की गई एवं देर रता तक 8 सौ दो पहिया वाहनों की बिक्री हुई। मंगलवार को गाडी की डिलीवरी के लिए शहर के सभी एजेंसियों को पहले ही एडवांस बुकिंग कराई गई थी। मारुति के ही 150 विभिन्न माडलों की डिलीवरी की गई। कुछ लोगों को अपने मनपसंद माडलों की डिलीवरी के लिए दो दिन की प्रतीक्षा करनी होगी। रायपुर से नई गाडियों का स्टाक कल तक आने की संभावना है। लोगों ने दीवाली के दिन डिलीवरी लेने की बात कही है। इस वर्ष कारों में ब्रेजा, स्विफ्ट, डिजायर, वैगनआर, स्कोडा, बोलेरो की विषेष मांग रही। वहीं बाइक में हीरो के विभिन्न माडल, पल्कर, याम्हा तथा बुलेट की विशेष मांग रही। हीरों के 3 सौ समेत कुल 8 सौ बाइक की डिलीवरी मंगलवार को की गई। 3 सौ वाहनों की डिलीवरी गुरुवार को होगी।

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इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार 10 करोड़ के पार : धनतेरस पर इलेक्ट्रनिक्स बाजर गुलजार रहा। इस वर्ष विशेष मांग मोबाइल, लैपटाप, कैमरा, ड्रायर, गैजेट्स, एलईडी, फ्रिज, गीजर, वाटर कूलर, फानूस, सजावटी लाइट्स एवं रंग-बिरंगे झालरों की रही। हालांकि चीन के बने झालरों एवं लाइट्स की खरीदारी नहीं करने की अपील के बाद भी सस्ते होने के कारण लोगों ने चीन के बने सस्ते लाइट्स ख्ररीदे। बाजार में ये झालरें 20 से लेकर 50 रुपए में बिके, वहीं अन्य लाइट 50 से 2 सौ रुपए में
बिक रहे थे।
रीयल स्टेट का बाजार ठंडा : जीएसटी की मार सबसे अधिक रीयल स्टेट पर पडी। पिछले वर्ष 50 निजी मकान तथा सौ से अधिक फ्लेैटों की बुकिंग धनतेरस पर हुई थी। इस वर्ष आंकडा घटकर 20 पर रुक गया। बिल्डरों एवं रीयल स्टेट कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी एवं सरकार की नीतियों के कारण व्यवसाय मंदा है। कई बिल्डरों ने मांग नहीं होने के कारण दर्जनों प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। खरीदार नहीं है, पहले 20 से 30 लाख में फ्लैट मिल जाते थे, अब इन कीमतों में कोई निजी मकान भी लेने को तैयार नहीं है।

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घरों में जलाए गए 13 दीप, मांगा धनवंतरी-लक्ष्मी से वरदान : मंगलवार को आयुर्वेद के प्रणेता भगवान धनवंतरी की पूजा के साथ ही प्रदोष काल में दीपोत्सव पर्व की शुरुआत की गई। अच्छे स्वास्थ्य व जीवन के लिए भगवान धनवंतरी की विधि-विधान से शुभ मुहूर्त पर रात 7 बजकर 32 मिनट पर पूजा-अर्चना की गई। साथ ही लक्ष्मी, गणेश व कुबेर की पूजा की गई। घर में 13 दीप जलाकर देवी-देवताओं का आह्वान किया गया। इसके साथ ही स्टील, चांदी व सोने सहित अन्य धातुओं के पात्र व सामग्री खरीदे गए। हर घर में पारंपरिक रंगोली सजाई गई। धनतेरस पर्व से ही दीपोत्सव की शुरुआत मानी गई है। स्वास्थ्य और औषधियों के देवता धन्वंतरी की पूजा की गई। इन सभी पूजाओं को घर में करने से स्वास्थ्य और समृद्धि व बेहतर स्वस्थ्य बना रहे यह कामना की गई। 108 बार भगवान धनवंतरी के मंत्र का जाप भी किया गया। ऐसी मान्यता है कि इस दिन धनवंतरी की पूजा करने से स्वास्थ्य सही रहता है। धनवंतरी की पूजा के बाद लक्ष्मी और गणेश का पूजन भक्ति भाव से किया गया।
13 दीपों का किया गया प्रज्ज्वलन : दीपावली के पहले दिन धनतेरस को तिथि के मुताबिक ही 13 दीप जलाने की प्रथा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तेरह दीप जलाकर मां लक्ष्मी व भगवान यम की पूजा होती है। इस दिन दीप जलाना उत्तम माना जाता है।

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रूप चर्तुदशी अथवा नरक चौदस आज : बुधवार को विधि-विधान से रूप चौदस का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि नरक चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसे रूप चौदस व छोटी दीपावली भी कहा जाता है। उत्तरा फाल्गुनी एवं हस्त नक्षत्र में यह पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान यमराज की पूजा की जाती है। उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है। सांसारिक मनुष्य नरक से मुक्ति पाने की कामना से भगवान यमराज की पूजा करता है। शास्त्रगत मान्यतानुसार, भगवान यमराज के रूष्ट होने पर मनुष्य को मृत्यु के बाद नरक लोक में जाना पड़ता है।और कठोर यातनाओं को बर्दाश्त करना पड़ता है। इसलिए सूर्यास्त के उपरांत प्रदोष काल में घर की दक्षिण दिशा में मिट्टी के 14 दीए जलाने का विधान है। इन 14 दीपों में तिल अथवा सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

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