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Festival News: दीपावली से पहले 4 और 5 नवंबर को खरीदी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र

CG News: हिन्दू धर्म में भूमि, वाहन व आभूषण की खरीदारी शुभ मुहूर्त पर किया जाता है।

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Festival News: दीपावली से पहले 4 और 5 नवंबर को खरीदी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र

Festival News: दीपावली से पहले 4 और 5 नवंबर को खरीदी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र

बिलासपुर। CG News: हिन्दू धर्म में भूमि, वाहन व आभूषण की खरीदारी शुभ मुहूर्त पर किया जाता है। इसमें पुष्य नक्षत्र को विशेष माना गया है। इस बार दीपावली से पहले 4 व 5 नवंबर को दो दिन खरीदी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य जगदानंद झा के अनुसार 4 नवंबर शनिवार को सुबह 8 बजे से पुष्य नक्षत्र की शुरुआत होगी, जो अगले दिन रविवार को सुबह 11 बजे तक विद्यमान रहेगा।

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ज्योतिषाचार्य के अनुसार भारतीय ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र का विशेष महत्व है। इन 27 नक्षत्र में पुष्य नक्षत्र को राजा माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र में भूमि, वाहन व आभूषण की खरीदारी को विशेष शुभ माना जाता है।

हिन्दू धर्म में दिवाली का पर्व प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। दिवाली को आने में एक सप्ताह का ही समय रह गया है। इसे देखते हुए घर से लेकर बाजार तक साफ-सफाई और सजावट का कार्य जोर शोर से चल रहा है। ज्योतिष की मानें तो इस साल दिवाली से कुछ दिन पहले दो दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा संयोग 400 साल बाद बन रहा है। दिवाली से पहले 4 और 5 नवंबर को पुष्य नक्षत्र का महामुहूर्त का संयोग बन रहा है। मान्यता के अनुसा पुष्य नक्षत्र में खरीदी को शुभ माना जाता है। ज्योतिष की मानें तो इसका कुछ राशियों पर अच्छा प्रभाव रहेगा। उन्होंने बताया कि 4 नवंबर को शनि अपनी स्व राशि कुंभ राशि में और देवताओं के गुुरु बृहस्पति मेष राशि में विराजमान रहेंगे। ऐसे में दोनों मिलकर मंगलकारी योग बना रहे हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग भी

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में योगों का बड़ा महत्व है। यदि कोई पर्व काल या विशेष माह या विशेष त्योहार के पूर्व नक्षत्र के साथ दिनों का शुभ संयोग बनता है तब विशेष प्रकार का योग निर्मित होता है। रविवार यानि 5 नवंबर के दिन भी पुष्य नक्षत्र का प्रभाव होने से यह सर्वार्थ सिद्धि योग कहलाएगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में सभी कार्य सिद्ध होते हैं। खरीदारी से लेकर पॉलिसी, बैंकिंग आदि के लिए इसको शुभ माना जाता है।


शनि व बृहस्पति का मिलता है आशीर्वाद

पुष्य नक्षत्र को श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस नक्षत्र का अधिपति शनि और उप स्वामी बृहस्पति है। दोनों ग्रहदेव प्रगति व लाभ के लिए अनुकूल माने जाते हैं। इन दो दिनों में खरीदी वृषभ, मेष, तुला धनु और कुंभ राशि को जरूर विशेष लाभ दे सकता है।

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इस नक्षत्र में खरीदी स्थायी सुख का कारक
ज्योतिषाचार्य ओंकार मिश्र ने बताया कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदी स्थायी समृद्धि प्रदान करती है। पुष्य नक्षत्र में सोने का खरीदना विशेष शुभ माना जाता है। यह ऐसा नक्षत्र है अगर इसमें भूमि, भवन के रूप में स्थायी संपत्ति खरीदी जाए तो स्थायी सुख का कारक बनती है। नया व्यवसाय शुरू करने से उतरोत्तर प्रगति की संभावना प्रबल होती है। इस दिन बही खाते, धार्मिक पुस्तकें, सोने,चांदी, तांबे, स्फटिक आदि से निर्मित मूर्तियां, यंत्र, सिक्के आदि खरीदना भी शुभ माना जाता है। नए वाहन, इलेक्ट्रानिक उत्पाद आदि खरीदना भी शुभता प्रदान करता है। खरीदारी का शुभ मुहूर्त पुष्य नक्षत्र शनिवार को सुबह 8 बजे से शुरू होकर अगले दिन रविवार को सुबह 11 बजे तक रहेगा क्योंकि उदय काल से अस्त काल तक की मान्यता भारतीय परंपरा में है। इस दृष्टिकोण से शनिवार और रविवार दोनों ही दिन पुष्य नक्षत्र की साक्षी रहेगी।