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10 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा संकेत, अब 4 महीने में होगा निर्णय

CG High Court News: हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों को राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन 4 महीने के भीतर निर्णय ले।
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बिलासपुर

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Shradha Jaiswal

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Updated: 11 Apr 2026, 10:37 AM IST

10 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा संकेत, अब 4 महीने में होगा निर्णय(photo-patrika

10 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा संकेत, अब 4 महीने में होगा निर्णय(photo-patrika

CG High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों को राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन 4 महीने के भीतर निर्णय ले। इस आदेश से लंबे समय से स्थायी नौकरी की मांग कर रहे कर्मचारियों में उम्मीद जगी है।

CG High Court News: क्या है पूरा मामला

यह मामला बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय से जुड़ा है। यहां के 9 कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वे साल 2009 से दैनिक वेतनभोगी (Daily-Wage Basis) के रूप में काम कर रहे हैं। इतने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी नहीं किया गया।

कर्मचारियों ने बताया कि इससे पहले भी कोर्ट ने उनके अभ्यावेदन (आवेदन) पर विचार करने के निर्देश दिए थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया। इसी वजह से उन्हें दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

हाईकोर्ट का साफ निर्देश

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया गया है कि इस पर कानून के अनुसार 4 महीने के भीतर निर्णय लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी जिक्र

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह कहा गया है कि 10 साल से ज्यादा सेवा दे चुके कर्मचारियों के नियमितीकरण पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने भी इस बात को मानते हुए कहा कि निर्णय लेते समय इन आदेशों को ध्यान में रखा जाए।

हजारों कर्मचारियों के लिए अहम फैसला

यह आदेश केवल 9 कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशभर के उन हजारों दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से अपने नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। इस फैसले से ऐसे कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है कि उनकी वर्षों की सेवा को देखते हुए अब स्थायी नियुक्ति पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।

आगे क्या होगा

अब संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन को कर्मचारियों द्वारा दिए जाने वाले नए अभ्यावेदन पर तय समय सीमा के भीतर फैसला लेना होगा। इससे यह साफ हो जाएगा कि कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा या नहीं। हाईकोर्ट का यह आदेश कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की तरह है। लंबे समय से अस्थायी रूप से काम कर रहे लोगों को अब उम्मीद है कि उन्हें स्थायी नौकरी मिल सकती है। अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।