
LB Teachers Case: सात शिक्षकों ने दायर की थी याचिका(photo-patrika)
Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नौकरी से बर्खास्त किए गए कर्मचारी के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले में बाद में बरी हो जाने मात्र से कर्मचारी को बर्खास्तगी अवधि का पूरा पिछला वेतन पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। हाईकोर्ट ने ‘नो वर्क, नो पे’ सिद्धांत को लागू करते हुए पूर्व कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी और कहा कि जिस अवधि में सेवा नहीं दी गई, उस अवधि का वेतन दावा नहीं किया जा सकता।
यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी के पूर्व कर्मचारी प्रसाद नायक (70 वर्ष) से जुड़ा है। वर्ष 2012 में एक निचली अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। इस सजा के आधार पर बिजली कंपनी ने अप्रैल 2013 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। बर्खास्तगी के बाद प्रसाद नायक ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। हालांकि अपील लंबित रहने के दौरान ही वर्ष 2018 में वे सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर चुके थे।
बाद में वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें बरी कर दिया। इसके बाद बिजली कंपनी ने 2021 में उनका बर्खास्तगी आदेश वापस ले लिया और उन्हें सांकेतिक रूप से सेवा निरंतरता का लाभ देते हुए पेंशन संबंधी सुविधाएं प्रदान कर दीं। लेकिन कंपनी ने अप्रैल 2013 से अगस्त 2018 तक की अवधि का वेतन, एरियर और अन्य वित्तीय लाभ देने से इनकार कर दिया। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए प्रसाद नायक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने पहले सिंगल बेंच द्वारा दिए गए आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि केवल आपराधिक मामले में बरी हो जाने से कर्मचारी स्वतः ही पूरे पिछले वेतन का हकदार नहीं हो जाता। अदालत ने माना कि संबंधित अवधि के दौरान कर्मचारी ने विभाग में कोई वास्तविक सेवा नहीं दी थी, इसलिए वेतन का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि इस मामले में ‘नो वर्क, नो पे’ का सिद्धांत पूरी तरह लागू होता है। अदालत के अनुसार जब किसी कर्मचारी ने विवादित अवधि में कार्य नहीं किया है, तब वह उस अवधि का वेतन अधिकार के रूप में नहीं मांग सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिजली कंपनी द्वारा बर्खास्तगी आदेश वापस लेना, सेवा की निरंतरता मानना और पेंशन संबंधी लाभ देना पर्याप्त एवं न्यायसंगत कदम है। ऐसे में पिछले वर्षों का पूरा वेतन और एरियर देने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा, जहां कर्मचारी आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के आधार पर सेवा से हटाए जाते हैं और बाद में उच्च अदालत से राहत प्राप्त करते हैं। फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि बरी होने के बावजूद पिछला वेतन स्वतः नहीं मिलेगा। प्रत्येक मामले में यह देखा जाएगा कि कर्मचारी ने संबंधित अवधि में वास्तविक सेवा दी थी या नहीं तथा परिस्थितियां क्या थीं।
Updated on:
01 Jun 2026 11:08 am
Published on:
01 Jun 2026 11:08 am
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