
छग हाईकोर्ट में आदिवासी समाज से पहली महिला जज बनीं विमला कपूर...
बिलासपुर. चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन नेसोमवार को हाईकोर्ट के हॉल नंबर 1 में हुए ओवेशन कार्यक्रम में चार जजों को शपथ दिलाते हुए पदभार ग्रहण कराया। जिन चार जजों को शपथ दिलाई गई, उनमें रजिस्ट्रार गौतम चौरडिय़ा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमला सिंह कपूर, रजिस्ट्रार विजिलेंस रजनी दुबे और अधिवक्ता पार्थ प्रतीम साहू शामिल हैं। इन चार जजों की नियुक्ति से हाईकोर्ट में जजों की संख्या 12 से बढकऱ 16 हो गई है। चार नए जजों में दो महिला एवं एवं दो पुरुष जज हैं। विमला सिंह कपूर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पहली आदिवासी महिला जज बनी हैं।
नव-नियुक्त सभी जजों ने सोमवार से ही युगलपीठ में अपना कार्यभार संभाल लिया। सीजे राधाकृष्णन की युगलपीठ में जज पीपी साहू, जस्टिस प्रींतिकर दिवाकर की युगलपीठ में जज गौतम चौराडिया, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की युगलपीठ मेे जज विमला सिंह कपूर और जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की युगलपीठ में जज रजनी दुबे शामिल की गई हैं।
सफल व्यक्ति के पीछे पुरुष का भी होता है योगदान - रजनी
यूं तो समाज में सदियों से धारणा चली आ रही है कि एक सफल व्यक्ति के पीछे स्त्री का योगदान होता है। लेकिन मेरे साथ ऐसी बात नहीं है, आज जिस मुकाम पर हूं। इसके पीछे मेरे पति की बडी भूमिका है। बिना उनके सहयोग के यहां तक आना कतई मुमकिन नहीं होता। माता-पिता के योगदान की जितनी बात करुं, कम ही होगा।
विपरीत परिस्थतियों में पिता का परिश्रम सराहनीय - प्रतीम साहू
विपरीत परिस्थतियों में मेरे पिता ने जितनी कड़ी मेहनत कर मुझे इस काबिल बनाया। मेरे पास कहने को शब्द नहीं हैं। आज उन्हीं की मेहतन का फल है, जो इस जगह पर पहुंचा हूं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पिता मिले। परिवार के अन्य सदस्यों का स्नेह भी सराहनीय रहा।
दादा-दादी बहुत याद आ रहे- गौतम
अपनों को इस जगह पर देखकर सबसे अधिक जिनकी याद आ रही है, वो मेरे दादा-दादी हैं। साफ शब्दों में अगर कहूं तो वो मेरे लिए भगवान तुल्य हैं। बस उनके सपनों को पूरा करुं, ये ही इच्छा है। वंचितों को न्याय देने से बेहतर क्या हो सकता है।
डीजे नीलम चंद सांख्ला बने रजिस्ट्रार
डीजे नीलम चंद सांख्ला को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रर के पद पर नियुक्त किया गया है। गौतम चौराडिय़ा के जज बनने के बाद के बाद ये पद खाली हो गया था। अब रायपुर के डीजे सांख्ला हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार का कार्यभार संभालेंगे।
खुशनसीब हूंं कि आदिवासी समाज से निकलकर यहां तक पहुंची- विमला
शपथ लेने के बाद अपने संबोधन में जस्टिस विमला सिंह कपूर ने कहा, यूं तो आदिवासी समाज में पढ़ाई-लिखाई का विशेष चलन नहीं है। लेकिन मैं अपने आपको खुशनसीब मानती हूं कि इस मुकाम तक पहुंची। इसका पूरे श्रेय मेरे माता-पिता, परिजनों और पूर्वजों को जाता है। इच्छा यही है कि लोगों के हित के लिए काम करुं और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए कुछ कर सकूं।
Published on:
19 Jun 2018 03:07 pm
