6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इन मुस्लिम बच्चों ने बप्पा के लिए घर छोड़ा, पंडाल बनाई और रात भर बारिश में हाथ जोड़कर भीगते रहे

PATRIKA EXCLUSIVE :मासूम बच्चों की आस्था में नहीं कोई मजहब की दीवार (Ganesh Chaturthi 2019)
2 min read
Google source verification
सबके गणेश: इन मुस्लिम बच्चों ने बप्पा के लिए घर छोड़ा, पंडाल बनाई और रात भर बारिश में हाथ जोड़कर भीगते रहे

सबके गणेश: इन मुस्लिम बच्चों ने बप्पा के लिए घर छोड़ा, पंडाल बनाई और रात भर बारिश में हाथ जोड़कर भीगते रहे

आकाश श्रीवास्तव / कोरबा / बिलासपुर. दो मासूम बच्चे, दूसरे धर्म के हैं, लेकिन मन मेे ललक थी कि हम भी बप्पा को विराजित कर उनकी पूजा करेंगे। डर भी था कि समाज और मोहल्ले वाले कहीं मना ना कर दे। इसलिए दोनों मुस्लिम बच्चे घर छोड़कर दूसरे वार्ड में सड़क किनारे साड़ी और बांस का तंबू बनाकर न केवल गणपति की स्थापना की बल्कि उनकी पूजा भी अपने सामथ्र्य के हिसाब से शुरू कर दी। (Ganesh Chaturthi 2019) भारी बारिश में ये बच्चे भींगते रहे, ठिठुरते रहे लेकिन बप्पा (Lord Ganesha) की मूर्ति को छोड़कर हटे तक नहीं, सुबह लोगों ने इनकी हालत देखी और पड़ताल की तो पता चला कि ये बच्चे दूसरे वार्ड से आए हैं।

कहते हैं ना कि बचपन धर्म, समाज और नीतियों के बंधन से मुक्त होता है, वो तो उन्मुक्त होता है। जहां मौका मिलता है होंठ को खोलकर मुस्कुरा लेता है, जहां मन करता है पंख पसासर कर उड़ान भर लेता है। वर्तमान में धर्म के नाम पर जिस तरह माहौल है इसके विपरीत इन दो बच्चों ने बड़ी सीख भी दी है। वार्ड के लोगों ने पत्रिका को बताया की मंगलवार की रात 12 बजे शुरु हुई तेज बारिश में भी बच्चों की भक्ति कम नहीं हुई। भीगे फर्श में त्रिपाल के सहारे दोनों कांपते हुए बैठे रहे। राहगीरों ने इसकी सूचना स्थानीय पार्षद राजा गुप्ता को दी। पार्षद ने जब उनसे पता पूछा तो बिलासपुर का गलत पता बता दिया। बाद में जब सख्ती की गई तो बच्चों ने पूरी कहानी बतायी। दोनों ही बच्चे शारदाविहार से लगे कुआंभांटा वार्ड के हैं।

डर था की अनुमति नहीं मिलेगी
पूछताछ में बच्चों ने पत्रिका को बताया कि उनको गणेशजी की मूर्ति स्थापित कर कर पूजा करनी थी, घर मेे अनुमति मिलेगी या नहीं इस बात को लेकर आशंका की स्थिति थी। इसलिए दोनों बच्चे 10 दिन के लिए घर से अपने एक जोड़ी कपड़े में निकल गए। लोगों ने पत्रिका को बताया की दोनों ही बच्चों ने आपस में चंदा किया। सीतामणी इलाके से गणेशजी की मूर्ति ढाई सौ में खरीदी। नारियल, माला व फूल लेकर पूजा भी शुरू कर दी। आसपास की कुछ महिलाओं ने सजावट के कुछ समान भी दे दिए। इस तरह दो दिन से बच्चे गणपति बप्पा की पूजा कर रहे थे। मंगलवार को भारी बारिश में भी वो वहां भिगते हुए पूरी रात डटे रहे।

ले जाया गया घर
पार्षद ने पत्रिका को बताया की बारिश में भीगने व टेंट की स्थिति को देखते हुए बच्चों को यहां नुकसान हो सकता था। उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें घर ले जाया गया। घर ले जाते समय दोनों बच्चे मायूस हो गए। उनको बप्पा की चिंता थी। स्थानीय महिलाओं ने गणेश प्रतिमा को अपने घर पर ले जाकर पूजा-अर्चना की बात कही और भरोसा दिया तब जाकर ये बच्चे जाने को तैयार हुए।

इधर घर वाले खोज-खोजकर परेशान
इधर दोनों बच्चों को घर वाले खोज-खोजकर परेशान हो गए थे। (ganesh chaturthi) रात मेे जब बच्चों को लेकर पार्षद पहुंचे तो परिवार वालों ने बताया कि इससे पहले कभी भी बच्चे कहीं नहीं जाते थे। दोस्तों, पड़ोसियों व पहचानवालों को फोनकर अपने स्तर पर खोजबीन की थी, लेकिन कहीं से इनकी जानकारी नहीं मिल रही थी। चौकी जाकर लापता की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले थे।