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NDPS केस में बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने नशे के कारोबारी की 15 साल की सजा बरकरार रखी, जानिए पूरा मामला

High Court: मादक पदार्थ मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने नशे के कारोबार में लिप्त दोषी की 15 साल की सजा को बरकरार रखा है।

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हाईकोर्ट (photo-patrika)

हाईकोर्ट (photo-patrika)

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मादक पदार्थ की बरामदगी, कब्जा और कस्टडी ठोस साक्ष्यों से साबित हो रही हो, तो इस आधार पर दी गई सजा उचित है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस आधार पर नशीली दवा बेचने के दोषी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई 15 साल की सजा बरकरार रखी है।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 की धारा 42, 50 और 52-ए के पालन में हुई प्रक्रियात्मक कमियां अभियोजन के मामले को तब तक पूरी तरह से खारिज नहीं करतीं, जब मादक पदार्थ की बरामदगी, कब्जा और कस्टडी की कड़ी (चैन ऑफ कस्टडी) ठोस साक्ष्यों से साबित हो रही हो। कोर्ट ने कहा कि अपराध के ठोस प्रमाणों को केवल प्रक्रियात्मक तकनीकी आधार पर तब तक नहीं नकारा जा सकता, जब तक कि आरोपी को उससे किसी गंभीर नुकसान होने की बात साबित न हो जाए।

यह है मामला

अपीलकर्ता शेख रहमान कुरैशी को 4 मई 2024 को रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि काशीराम नगर ओवरब्रिज के नीचे एक व्यक्ति मादक पदार्थ बेचने की फिराक में है। तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद एक काले रंग के बैग से "स्पास्मो प्रोक्सीवन प्लस" कैप्सूल के 25 स्ट्रिप (कुल 600 कैप्सूल) बरामद किए गए। फोरेंसिक जांच में इन कैप्सूलों में डायसाइक्लोमाइन, ट्रामाडोल और एसिटामिनोफेन जैसे प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की पुष्टि हुई।

आरोपी के वकील ने दिया प्रक्रिया में खामी का तर्क

अपीलकर्ता के वकील ने दलील दी कि पूरा मामला प्रक्रियात्मक खामियों के कारण दूषित है। उनके मुख्य तर्क थे किधारा 52-ए और 55 का उल्लंघन किया गया। जब्ती सूची (इन्वेंट्री) में उचित विवरण नहीं था और 600 में से केवल 48 कैप्सूलों का ही सैंपल लिया गया, जो कानूनी रूप से प्रतिनिधि सैंपल नहीं माना जा सकता। वकील ने यह आरोप भी लगाए कि मालखाना रजिस्टर में ओवरराइटिंग थी और जब्ती के समय सील को मालखाने में जमा नहीं किया गया था। एफएसएल को सैंपल भेजने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए गए।

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