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Smart Investigation in Murder Cases: हत्या मामलों में ‘स्मार्ट विवेचना’ का वार, 124 बिंदुओं की चेकलिस्ट अनिवार्य, जानें जांच में क्या होगा नया?

Bilaspur News: हत्या जैसे गंभीर अपराधों की जांच को और प्रभावी व परिणाममुखी बनाने के लिए बिलासपुर रेंज पुलिस ने ‘स्मार्ट विवेचना’ की नई कार्यप्रणाली लागू की है...

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आईजी रामगोपाल गर्ग ने बिलासपुर रेंज में शुरू की नई कार्यप्रणाली (फोटो सोर्स- पत्रिका)

आईजी रामगोपाल गर्ग ने बिलासपुर रेंज में शुरू की नई कार्यप्रणाली (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Smart Investigation in Murder Cases: हत्या जैसे गंभीर अपराधों में अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इसी लक्ष्य के साथ बिलासपुर रेंज पुलिस ने ‘स्मार्ट विवेचना’ की नई रणनीति लागू करते हुए अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है।

बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने आयोजित प्रशिक्षण सत्र में हत्या के मामलों की जांच को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। इस दौरान एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हुए। आईजी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि अदालत में ठोस साक्ष्यों के आधार पर उसे सजा दिलाना है। नई व्यवस्था के तहत अब हर हत्या प्रकरण में 124 बिंदुओं की विस्तृत चेकलिस्ट लागू की गई है, जिसका पालन चालान पेश करते समय अनिवार्य होगा।

स्मार्ट विवेचना के 5 बड़े बदलाव

  • ई-साक्ष्य ऐप से हर जब्ती की वीडियोग्राफी 124 बिंदुओं की अनिवार्य जांच चेकलिस्ट
  • 100 किमी तक सीसीटीवी मैपिंग
  • डिजिटल फुटप्रिंट (गूगल, व्हाट्सएप) की जांच डीएनए और जैविक साक्ष्यों पर विशेष फोकस

जांच में क्या होगा अब अनिवार्य

  • घटनास्थल तुरंत सील, ‘गोल्डन ऑवर’ में कार्रवाई
  • फोरेंसिक, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट टीम की मौजूदगी
  • साक्ष्यों की चेन ऑफ कस्टडी का पूरा रिकॉर्ड
  • रात्रिकालीन पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी
  • एफएसएल रिपोर्ट में स्पष्टता न होने पर अनिवार्य क्वेरी

ई-साक्ष्य ऐप का उपयोग जरूरी

प्रशिक्षण में ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के उपयोग को अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत सभी जब्तियों की वीडियोग्राफी की जाएगी। इससे गवाहों के मुकरने की स्थिति में भी डिजिटल साक्ष्य मजबूत बने रहेंगे। साथ ही घटनास्थल को ‘गोल्डन ऑवर’ में सुरक्षित करने, फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में साक्ष्य संग्रह और बिना दस्ताने साक्ष्य को न छूने जैसे निर्देश भी दिए गए।

डिजिटल जांच को भी नई धार

डिजिटल जांच को भी नई धार दी गई है। अब विवेचक गूगल टेकआउट, इंटरनेट हिस्ट्री, व्हाट्सएप लॉग्स और 100 किमी दायरे के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच करेंगे। डीएनए और जैविक साक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी को वैज्ञानिक रूप से साबित करने पर जोर रहेगा। आईजी गर्ग ने बताया कि अप्रैल 2026 के बाद के सभी हत्या मामलों में यही प्रक्रिया लागू होगी और ऐसे प्रशिक्षण सत्र हर सप्ताह आयोजित किए जाएंगे।