
गृह आरोग्य योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार : स्वास्थ्य मंत्री
CG Health News: अनियमित भोजन और बदलते लाइफस्टाइल के बीच हड्डियों की बीमारी के मरीजों की संख्या में तेजी से विस्तार हुआ है। इन्हीं में से एक हड्डी से जुड़ी बीमारी है ऑस्टियोपोरोसिस। ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें बोन डेंसिटी कम हो जाने के चलते हड्डी भुरभुरी हो जाती है।
सिम्स के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रविकांत दास बताते हैं कि ओपीडी में ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े मामले बढ़े हैं। हर दिन 150 की ओपीडी में 8 से 10 मरीज इस बीमारी से जूझ रहे होते हैं। ऐसा होना का सबसे प्रमुख कारण है शरीर में विटामिन-डी की कमी, विटामिन-डी हमारे शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। वहीं इसकी कमी होने से हड्डी अपनी क्षमता खो देती है और उसकी बाहरी सतह कमजोर और पतली हो जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप मामूली चोट लगने से भी हड्डियों के टूटने का खतरा बना रहता है।
इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी (वर्टीब्रा) में फ्रैक्चर का जोखिम विशेष रूप से होता है। कुछ मामलों में तो यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती हैं कि छींकने से भी हड्डी टूट जाती है।
दुनियाभर में हड्डियों की बीमारी से जूझ रहे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स की माने तो पहले जो बीमारी 40-50 साल की उम्र में होती थीं वो अब 20-30 साल की उम्र में ही होने लगी है। इसके प्रमुख कारण हैं खाने में पोषक तत्वों वाले भोजन की कमी, बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल, अधिक स्ट्रेस का होना और बढ़ती नशे की लत। ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है।
नशे के चलते बढ़ सकती है समस्या
बढ़ती नशे की लत और घटती फिजिकल एक्टिविटी के कॉम्बिनेशन ने युवाओं को अनेक तरह की बीमारियां दी हैं। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या भी इन्हीं में से एक है। शराब सेवन और धूम्रपान के कारण भी ओस्टियोपोरोसिस की समस्या सामने आ सकती है । महिलाओं में मेनोपॉज के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव में भी ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है।
मामूली तकलीफ को नजरअंदाज करना पड़ सकता है महंगा
एक्सपर्ट्स की मानें तो हड्डियों के मामले में मामूली तकलीफ को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। क्योंकि हड्डी के घनत्व में कमी आने में काफी वक्त लगता है जिसके चलते ऑस्टियोपोरोसिस जैसे बीमारियों के कोई लक्षण नहीं होते। कुछ लोगों में इसके लक्षण कभी भी विकसित नहीं होते। एक बार इस बीमारी की वजह से जब हड्डियां टूटनी शुरू हो जाती हंै, तब जाकर इस बीमारी के बारे में पता चल पाता है।
कैल्शियम युक्त भोजन खाने की जरूरत
डॉ. रविकांत दास
वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ, सिम्स
हड्डियों से कैल्शियम के क्षरण होने में काफी वक्त लगता है जिसके चलते इस बीमारी के सिम्पटम्स जल्दी नहीं दिखते हैं। लेकिन अगर मामूली चोट से भी हड्डियों में फ्रैक्चर की समस्या है तो यह ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत हो सकते हैं। इसके डाइग्नोसिस के लिए क्लीनिकल टेस्ट है जिसकी सहायता से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। वहीं इसके उपचार में सबसे प्रमुख रोले निभाता है व्यायाम। इसके साथ ही हमें कैल्शियम युक्त भोजन खाने की जरूरत है। अगर शरीर में विटामिन-डी की कमी है तो सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
Published on:
31 Oct 2023 02:23 pm
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