
किशोरवय के अंतर्मन को समझना है, उनके अंदर झंझावात की कैसी आंधियां चल रही हैं, तो डार्कनाइट की यात्रा इसमें आपकी मदद करेगी। ये भोगा हुआ ऐसा यथार्थ है, जिससे दुनिया का हर किशोर मन साम्यता महसूस करेगा। कुछ इन्हीं अल्फाजों के साथ लंदन बर्मिंघम के अप्रवासीय लेखक संदीप नैय्यर ने अपनी किताब का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कथानक के विस्तार के संदर्भ में आगे बयान करते हुए कहा कि 15 वर्ष की अवस्था हारमोनल चेंजेस की अवस्था होती है। शरीर में होने वाले परिवर्तन का असर मन-मस्तिष्क पर इतनी तीव्रता से होता है कि इसमें संतुलन बनाना एक कठिन परिस्थिति है। इस दौर से सभी पीढिय़ां गुजरती हैं, गुजरना ही होगा। इसे समझने की ईमानदार कोशिश डार्कनाइट किताब में की गई है। ये किताब मन की उस स्थिति का बखान करती है, जो सारे अर्थ तोड़ दे, जैसा प्रश्न हो जवाब भी वैसा ही होना चाहिए।
'नए वक्त में नए लेखन का स्वागत है'
'पत्रिका उत्सव' के पहले दिन दूसरा सत्र बिलासपुर में हुआ। शहर के सीएमडी कॉलेज में कार्यक्रम रखा गया था। अपने सामाजिक सरोकारों के उद्देश्य के साथ काम करने वाले 'पत्रिका' परिवार का प्रयास है, कि प्रदेश के साहित्यकारों को जमीनी स्तर पर पहचान दी जाए। हालांकि ऐसे नामचीन शख्सियत किसी परिचय की मोहताज नहीं होती पर किसी भी विधा को समाज के सम्मुख प्रस्तुत करने के लिए एक उचित प्लेटफॉर्म की जरूरत तो होती है। बुधवार को लंदन के अप्रवासी भारतीय लेखक संदीप की कितान डार्कनाइट पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसपी मयंक श्रीवास्तव, दिग्गज साहित्कार सतीश जायसवाल, नामवर कवि सतीश सिंह, सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन संजय दुबे समेत कॉलेज के प्रोफेसर एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोगा मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कॉलेज के चेयरमैन संजय दुबे ने कहा, ऐसे आयोजनों से कॉलेज की गरिमा बढ़ती है। जब विदेश में रह रहा एक लेखक हिंदी भाषा में किशोरमन के मन की व्यथा को प्रस्तुत करता है, तो अच्छा लगता है। वरिष्ष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल ने पुस्तक नहीं पढऩे का हवाला देते हुए किताब की जब सटीक व्याख्या की तो लेखक समेत पूरा सभागार अभिभूत हो गया। जांजगीर से आए कवि व साहित्यकार सतीश सिंह ने कहा, नए वक्त में नए तरह के लेखन का स्वागत होना चाहिए।
अच्छे वक्ता नहीं होने का हवाला देते हुए साहित्यकारों पर चोट कर गए मयंक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मयंक श्रीवास्तव अच्छे वक्ता नहीं होने का हवाला देते हुए साहित्यकारों पर चोट कर गए। अपने सारगर्भित कथन में उन्होंने लेखकों पर कभी-कभी ईमानदारी से अपनी बात नहीं रखने का आरोप भी लगाया। कुछ विषयों पर चुप रहने तथा गोपनीयता बरतने को लोकहित में नहीं करार देते हुए पारदर्शिता की पुरजोर वकालत की। साथ ही कॉलेज के छात्रों को चुटीले अंदाज में फोकस रहने तथा किशोरवय के परिवर्तन को शाश्वत नियम की तरह भोगने की सलाह भी दी। 'पत्रिका' परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए पत्रिका बिलासपुर के स्थानीय संपादक बरुण सखाजी ने कहा, आगामी तीन दिनों तक प्रदेश के तीन शहरों में साहित्य एवं संस्कृति की एक मशाल जलाने का एक छोटा सा प्रयास किया जा रहा है। उद्योगनगरी कोरबा और संस्कृति की नगरी रायगढ़ में 4 व 5 जनवरी को ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसमें कुछ सुलगते प्रश्र और उसके निदान प्रस्तुत किए जाएंगे। डार्कनाइट पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा 15 वर्ष की वय से गुजर रहे किशोर मन को समझने की कोशिश की गई है। ये कितना सार्थक हुआ, बताएं। कार्यक्रम में कवि सतीश सिंह ने भी उत्सुकता जताते हुए कहा डार्क नाइट उजास की ओर ले जाने वाली एक पुस्तक प्रतीत होती है। किशोर को उनके खोए हुए कई सवाल के जवाब मिल जाएंगे। इस अवसर पर छात्रों और कॉलेज के प्रोफ्रेसरों के सवाल भी लिए गए। मंच संचालन वीके गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में उपप्राचार्य पीएल चंद्राकर, अलका पंत, वेरापाणि दुबे, एसके जैन समेत कॉलेज के सभी विभाग के एचओडी, प्रोफेसर और बड़ी संख्या में छात्रों की उपस्थिति रही।
Updated on:
04 Jan 2018 05:27 pm
Published on:
04 Jan 2018 02:06 pm
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