
वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया एवं नीट 7 दिन में रिजल्ट जारी करे
बिलासपुर. सीजे अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की युगलपीठ ने वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीएसई को एक सप्ताह के भीतर रुके हुए रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही नीट परीक्षा के फॉर्म में विभागीय कर्मचारियों के लिए अलग से कॉलम की व्यवस्था करने के निर्देश देते हुए 25 वर्ष की आयु सीमा को अवैधानिक माना है। आदेश में कोर्ट ने ये भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता चयनित होते हैं तो दाखिले की अंतिम तिथि 30 सितंबर के बाद भी उन्हें प्रवेश दिया जाए। सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी गिरीश और रीमा नंदी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि नीट की परीक्षा देने के बाद भी सीबीएसई द्वारा बैचलर डिग्री ऑफ वेटनरी साइंसेज की रिजल्ट जारी नहीं किया जा रहा।
सीबीएसई का कहना है कि इस परीक्षा में शामिल होने की अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष है। जिन लोगों की उम्र इससे अधिक है, उनका रिजल्ट नियमानुसार जारी नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता की ओर से मामले की पैरवी करते हुए अधिवक्ता सुनील कुमार सोनी ने कहा, ये नियम सामान्य उम्मीदवारों के लिए है। लेकिन विभागीय प्रमोशन के उम्मीदवारों पर ये नियम लागू नहीं होते। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि असिस्टेंट वेटनरी सर्जन के पद पर पदोन्नति के लिए 5 वर्ष की सेवा अवधि और बीबीएसई की डिग्री अनिवार्य की गई है। याचिकाकर्ता के विभागीय सेवा में होने के कारण 25 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित किया जाना वैधानिक नहीं है। याचिकाकर्ताओं का परीक्षा परिणाम जारी किया जाए। अधिवक्ता के तर्क से सहमत होते हुए कोर्ट ने एक सप्ताह में परीक्षा परिणाम जारी करने के आदेश दिए हैं।
गुड़ाखू उत्पाद पर प्रतिबंध मामले में केंद्र, राज्य ने नहीं दिया जवाब, सुनवाई 6 सप्ताह बाद : प्रदेश में संचालित गुड़ाखू फैक्ट्रियों पर प्रतिबंध को लेकर लगाई गई याचिका पर सीजे अजय कुमार त्रिपाठी की युगलपीठ में शुक्रवार को सुनवाई की गई। इस मामले में तीन पक्षकारों में से एक ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। अब राज्य व केंद्र सरकार को अपना जवाब प्रस्तुत करना है। मामले की सुनवाई अब 6 सप्ताह बाद होगी। बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने गुडाख़ू के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में संचालित किसी भी गुड़ाखू फैक्ट्री के पास लाइसेंस नहीं है। बिना लाइसेंस के संचालित इन कंपनियों पर शासन किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं कर रही है। सौंदर्य प्रसाधन बनाने के नाम पर इन कंपनियों में तंबाकू उत्पाद बनाए जा रहे हैं। गुड़ाखू की जांच के बाद इन उत्पादों में आर्सेनिक नामक घातक रसायन पाया गया है, जो अत्यंत जानलेवा है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य, केंद्र शासन और उत्पाद कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया था।
Published on:
29 Sept 2018 01:14 pm
