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Breaking News: विद्युत कंपनी में 3000 लाइनमैन की भर्ती प्रक्रिया निरस्त, हाईकोर्ट ने इस गड़बड़ी पर जारी किया आदेश

Linemen Recruitment Canceled: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने लाइनमैन के 3 हजार पदों पर निकाली थी भर्ती, एक अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट (High Court) में दाखिल की थी याचिका, सिर्फ कंपनी में ही संविदा पर कार्यरत 2700 कर्मियों को नियमित नियुक्ति (Regular appointment) देने से सामान्य बेरोजगारों के साथ होगा भेदभाव

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Linemen recruitment

Chhattisgarh high court

बिलासपुर. Linemen Recruitment Canceled: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने 3 हजार लाइनमैन के पदों पर भर्ती निकाली थी। इसमें 1.36 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। फिजिकल टेस्ट की तिथि भी निर्धारित हो चुकी थी लेकिन इसे कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया था। इधर एक अभ्यर्थी ने कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मियों को दिए जा रहे बोनस अंक में भेदभाव का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट 3 हजार लाइनमैन की भर्ती (Recruitment of Linemen) के विज्ञान को निरस्त कर दिया है। सिंगल बेंच ने माना है कि उम्मीदवारों को बोनस अंक देने में भेदभाव किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरु करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद विद्युत वितरण कंपनी को फिर से भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करना होगा।


छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने परिचारक (लाइनमैन) के 3000 पदों पर सीधी भर्ती के लिए 12 अगस्त 2021 को विज्ञापन जारी किया था। इसमें 1 लाख 36 हजार बेरोजगार युवाओं ने आवेदन किया।

10वीं की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंक और पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में कार्य अनुभव के बोनस अंक को मिलाकर चयन किया जाना था। इस आधार पर भर्ती की मेरिट लिस्ट तैयार की जाती। 1 से 3 साल तक के अनुभवी को 20 अंक तथा 3 साल से ज्यादा अनुभव रखने वालों को 30 अंक देने का प्रावधान रखा गया था।

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बेखराम ने लगाई याचिका, कहा- संविदा कर्मियों को भर्ती का प्रयास
रायपुर निवासी बेखराम साहू ने भर्ती प्रक्रिया के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि विद्युत वितरण केंपनी ने भर्ती में संविदा कर्मियों को प्राथमिकता देने के साथ ही उनकी नियुक्ति की तैयारी कर ली है। इसी हिसाब से अनुभव अंक वाले को प्राथमिकता दी जा रही है, जो संवैधानिक नहीं है।

याचिका में बताया कि संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार भर्ती में समानता होनी चाहिए। लेकिन विद्युत वितरण कंपनी ने भर्ती में भेदभाव किया है। उसने मनमानी तरीके से की जा रही भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की थी।

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अनुभव का नहीं दिया जा रहा लाभ
याचिकाकर्ता (petitioner) बेखराम ने यह भी बताया कि वह रायपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी में कार्य करता था लेकिन उसके अनुभव को चयन में कोई मान्यता नहीं दी गई है। यहां तक कि विद्युत तकनीकी में आईटीआई की उपाधि को भी कोई वेटेज नहीं दिया गया है।

बेखराम के अनुसार पूरी प्रक्रिया खुली और सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के नाम पर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में कार्यरत लगभग 2700 संविदा कर्मियों को नियमित नियुक्ति देने के लिए नियम बनाए गए हैं। इससे सामान्य बेरोजगार ठगे जा रहे हैं, क्योंकि उनके चयनित होने के अवसर बहुत ही कम हैं।