
बिलासपुर . राज्य शासन ने मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, आयुर्वेदिक कॉलेज, आयुवेर्दिक चिकित्सालय में प्रतिमाह दवाई और उपकरणों में होने वाले खर्च में कटौती कर दी गई है। शासन ने सभी के लिए अलग-अलग हर महीने का बजट बनाया है। इसी आधार दवाइयां और उपकरणों की खरीदी की जाएगी। अगर उससे ज्यादा की खरीदी करनी होगी तो सीजीएमएससी से अनुमति लेनी होगी। शासन के इस आदेश से मरीजों के लिए लोकल परचेज के माध्यम से होने वाली दवा खरीदी के बजट में लगभग एक चौथाई कमी कर दी गई है। सिम्स में आने वाले इमरजेंसी के मरीजों का न तो इलाज हो पाएगा न ही उनको दवा मिल पाएगी। राज्य शासन द्वारा दवाइयों और उपकरण खरीदी के बजट पर कटौती से बिलासपुर संभाग के सबसे बड़ा अस्पताल सिम्स में ज्यादा फर्क पड़ेगा। यहां शासन से 25 लाख रुपए दवाई के लिए दिया जाता है वहीं लोकल पर्चेस के माध्यम से हर महीने लगभग 15 लाख रुपए की दवा की खरीदी की जाती है। इसे घटाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है। अगर किसी प्रकार की इमरजेंसी आती है तो सीजीएमएससी से अनुमति लेने के बाद ही अधिक की खरीदी की जा सकती है।
बताया जाता है सीजीएमएससी से अनुमति मिलने में कम से सात से 10 दिन का समय लगेगा। सिम्स 700 बिस्तर का होने जा रहा है। यहां दिनों दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। संभाग में कही भी बड़ी दुर्घटना होती है तो थोक में मरीजों को सिम्स भेज दिया जाता है। एेसी स्थिति में डाक्टरों को आनन फानन में उपचार करना पड़ता है। अगर एेसी इमरजेंसी आएगी तो बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
ये है पैमाना : स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव एसएन मोटवानी ने एक आदेश जारी कर सभी अस्पतालों के खर्च का बजट बना दिया है। आयुर्वेदिक कालेज, चिकित्सालय प्रतिमाह दवाई के लिए लिए स्वीकृत 1 लाख और उपकरण खर्च 50 हजार रुपए से दवा और उपकरण अपने स्तर पर क्रय कर सकेगें। मेडिकल कालेज प्रतिमाह 5 लाख रुपए की दवा और 5 लाख रुपए के जरूरत के सामान अपने स्तर पर क्रय कर सकेगें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रतिमाह 2 लाख 50 हजार की दवा और 2 लाख 50 हजार के उपकरण की खरीदी की जा सकती है।
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पत्रिका व्यू...: मरीजों की दवा में कटौती तो न करें : सरकारी अस्पतालों पर बड़ी संख्या में कमजोर वर्ग के मरीज निर्भर हैं। इसकी वजह है कि वे निजी अस्पतालों में दवा और भर्ती का इलाज वहन नहीं कर सकते। सरकार अन्य कई मदों में भारी-भरकम खर्च करती है, फिर दवा के बजट में ही कटौती समझ से परे हैं। ऐसा कर सरकार एक बड़े वर्ग को इलाज से की सुविधा से वंचित करने पर तुली है। कटौती करनी ही है तो दूसरे मदों में कटौती की जा सकती है। मरीजों की दवा और उपकरणों में कटौती कर सरकार एक बड़े वर्ग के इलाज की सुविधा से वंचित कर देगी। जरूरी है कि उनके लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएं, न कि कटौती की जाए।
ऐसे मामलों में पड़ती है जरूरत : केस 1- बहतराई में बच्चों को जहरीली चाकलेट दी गई थी। आनन फानन में 22 बच्चों को सिम्स लाया गया। 13 बच्चों को रात भर रोक कर तत्काल इलाज किया गया।
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केस 2 . घुरु अमेरी के स्कूल में दिन दहाड़े घुसकर टा्रफी बांटी गई। इसमें 10 बच्चों को बेहोशी की हालत में सिम्स में भर्ती किया गया। इलाज के बाद दूसरे दिन छुट्टी दे दी गई।
केस 3. जूना बिलासपुर में भागवत कथा के दौरान एलईडी बल्ब की गैस से आंखों में परेशानी होने पर 50 लोगों को भर्ती किया गया। इसमें से कुछ लोगों का इलाज चल रहा है।
केस 4. पेन्ड्रा रोड बंजारी घाट के पास बस पलटने से 35 मरीजों को सिम्स में भर्ती कर उपचार किया गया। अभी कुछ मरीज भर्ती है।
प्रमुख सचिव देंगे जानकारी : मेडिकल कालेज सहित अन्य अस्पतालों के बजट में कटौती शासन द्वारा किया गया है। इस मामले में प्रमुख सचिव की विस्तार से जानकारी दे सकते हैं।
एके चंद्राकर, डीएमई
Published on:
29 Nov 2017 11:12 am
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