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मरीज की जान बचाने परिजन भगवान को करते रहे याद

12 बजे तक मरीजों को समझ आ गया कि अब डॉक्टर नहीं आने वाले। तब वे बिना उपचार लौटने लगे और दोपहर एक बजे तक ओपीडी में सन्नाटा छा गया।

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बिलासपुर . तीन दिन की शासकीय छुट्टी होने से कारण डाक्टर अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज करना तो दूर उनको देखने तक नहीं आए। इमरजेंसी में जिन डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी वे भी नहीं पहुंचे । अस्पताल में भर्ती मरीज दर्द से कराहते रहे। लेकिन ड्यूटी में उपस्थित नर्सो ने इमरजेंसी काल नहीं किया। उल्टा मरीज के परिजनों को डांट डपट करते रहे। वहीं तीन दिन बाद मंगलवार को अस्पताल खुलेगा इसलिए ओपीडी में भारी भीड़ रहने की संभावना है। तीन-चार दिन की शासकीय छुट्टी होने पर भी सिम्स प्रबंधन द्वारा इमरजेंसी के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। हर बार की तरह इस बार भी कुछ डाक्टरों की ड्यूटी लगाई थी लेकिन वे अस्पताल नहीं आए। वार्डो में भर्ती मरीज बार बार नर्सो से डाक्टर को बुलाने की मांग करते रहे लेकिन नर्सो ने डॉक्टरों को फोन तक नहीं किया। तिफरा निवासी उर्मिला बाई को आर्थोपेडिक वार्ड में भर्ती किया गया था। शनिवार को सुबह सिम्स के एमएस डाक्टर रमणेश मूर्ति व डाक्टर लखन सिंह के कहने पर इलाज किया गया। इसके शाम को कोई डाक्टर नहीं आए। रविवार को एक जूनियर डाक्टर आए तो मरीज के परिजन मरीज के दर्द होने की बात कही तो वे नाराज हो गए। मरीज के परिजन को उल्टा सीधा सुनने लगे। वहीं इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड को दिया गया तो वे स्मार्ट कार्ड को वापस कर दिए।
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इंतजार के बाद निराश लौटे मरीज : सिम्स की ओपीडी में ज्यादातर कर्मचारी व नर्स गप्पे मारते दिखे। वहीं डॉक्टर केबिन से नदारद थे। सुबह 11 बजे तक की स्थिति में कोई डॉक्टर मरीजों को नहीं देख रहा था। लिहाजा पहुंचने वाले मरीज इंतजार करने लगे। 12 बजे तक मरीजों को समझ आ गया कि अब डॉक्टर नहीं आने वाले। तब वे बिना उपचार लौटने लगे और दोपहर एक बजे तक ओपीडी में सन्नाटा छा गया।
मरीज के साथ दुव्र्यवहार करना ठीक नहीं : छुट्टी होने के बावजूद कुछ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी। मरीज से दुव्र्यवहार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर रमणेश मूर्ति, अस्पताल अधीक्षक सिम्स

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