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CG Election 2023: प्याज के बढ़ते दाम ग्राहकों के ही नहीं नेताओं के भी निकाल रहे आंसू, बना चुनावी मुद्दा

CG News: प्याज के दाम भाजपा का दामन छोड़ने को तैयार ही नहीं हैं।

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CG Election 2023: प्याज के बढ़ते दाम ग्राहकों के ही नहीं नेताओं के भी निकाल रहे आंसू, बना चुनावी मुद्दा

CG Election 2023: प्याज के बढ़ते दाम ग्राहकों के ही नहीं नेताओं के भी निकाल रहे आंसू, बना चुनावी मुद्दा

बिलासपुर। CG News: प्याज के दाम भाजपा का दामन छोड़ने को तैयार ही नहीं हैं। जब भी चुनाव आता है, इसके दाम बढ़ने लगते हैं। इतिहास गवाह है कि इसी के चलते भाजपा की दिल्ली सरकार गिर गई थी। ऐसी गिरी कि अब तक वहां नहीं उबर पाई है। लिहाजा वर्तमान में यह एक बार फिर चुनावी मुद्दा बन गया है। कांग्रेसी जहां इसे भुनाने में जुट गए हैं तो वहीं भाजपा इससे घबरा रही।

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पिछले दो सप्ताह के प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वर्तमान में फुटकर बाजार में यह 60 से 70 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। जल्द 100 रुपए प्रति किलो का आंकड़ा पार होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह एक ओर कांग्रेस के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेसी प्याज की महंगाई का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते हुए महंगाई बढ़ाने वाली सरकार बता रहे हैं, तो भाजपाई जनता के इस प्रश्र पर सफाई देते नजर आ रहे हैं। वे इसके पीछे राज्य सरकार को दोषी करार दे रहे हैं।

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बाजपाई भले ही अपनी ओर से हर तरह की सफाई पेश कर रहे, पर मन ही मन डरे हुए हैं। क्योंकि इसी प्याज के बढ़ते दाम की वजह से वर्ष 1998 में भाजपा सरकार को दिल्ली में सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। उसके बाद से वहां भाजपा की सरकार बनी ही नहीं। बतादें कि प्याज का राजनीति से रिश्ता वर्ष 1980 में भी रहा, जब देश में प्याज की महंगाई चुनावी मुद्दा बनी थी। उस समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सरकार पर प्याज के दाम को काबू में रखने में नाकाम होने का आरोप लगाया था। इसके बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी 1980 में लोकसभा चुनाव जीतकर दोबारा सत्ता में आईं थीं।

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डिफेंसिव भाजपा

वर्तमान में प्याज के बढ़ते दाम को लेकर भाजपा के नेता डिफेंसिव मोड में नजर आ रहे हैं। विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के दौरान एक ओर राज्य सरकार को इसका कारण बता रहे, क्योंकि यहां सत्ता कांग्रेस की है। दूसरी ओर यह भी कह रहे कि जल्द दूसरे राज्यों से आवक शुरू होते ही दाम अपने आप घट जाएंगे। बहरहाल व्यापारियों की मानें तो खरीफ की प्याज की आवक में लेटलतीफी होने की वजह से दाम बढ़े हैं।

जिले में प्याज की आवक मुख्य रूप से नासिक, सिमला से होती है। वहां से जैसे ही आवक बढ़ेगी, दाम लेबल पर आने की बात कही जा रही है। कुछ भी हो वर्तमान में तो चुनाव है, लिहाजा इसका असर चुनाव पर पड़ेगा ही। अब प्याज का झार किस पार्टी को रुलाता है, यह विधानसभा चुनाव का परिणाम ही बताएगा।