1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Shikshak Bharti: नियुक्ति में देरी… D.Ed अभ्यर्थियों ने दी भूख हड़ताल की धमकी

Shikshak Bharti: 10 दिसंबर 2023 को हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया था कि 2 सप्ताह के भीतर डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी..
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बिलासपुर

•

image

Chandu Nirmalkar

•

Updated: 29 Dec 2024, 4:48 PM IST

Teacher news

Shikshak Bharti: छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत डीएड अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिली है, जबकि हाइकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट ने कई बार इस मामले में आदेश जारी किए हैं। 10 दिसंबर 2023 को हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया था कि 2 सप्ताह के भीतर डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समय बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया, जिससे अभ्यर्थी परेशान हैं। अब 14 जनवरी को अगली सुनवाई होनी है, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही हो सकती है।

Shikshak Bharti: अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

डीएड अभ्यर्थियों ने शासन और शिक्षा विभाग से जल्द नियुक्ति की मांग की है, क्योंकि वे पिछले 1.5 साल से अपने हक से वंचित हैं और मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र नियुक्ति नहीं दी जाती, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे और सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे।

यह भी पढ़ें: Shikshak Bharti: बेरोजगार हुए अतिथि शिक्षकों ने लगाई गुहार, CM से कहा- सरकार आते ही हमें नौकरी से क्यों निकाला

डेढ़ वर्ष से अटका है मामला

डीएड अभ्यर्थियों ने बताया कि हाइकोर्ट ने 21 अगस्त 2023 को बीएड अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहराते हुए केवल डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया था। इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया 23 से 29 अगस्त तक हुई, लेकिन नियुक्ति पूरी नहीं हो पाई। बीएड अभ्यर्थियों ने सुप्रीमकोर्ट से स्टे आदेश लिया, जिससे स्थिति जटिल हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द होने पर उनका हक नहीं माना जाएगा। अभ्यर्थियों ने कई आंदोलन किए, फिर भी समाधान नहीं हुआ।