
कमलेश रजक/ बिलासपुर . सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने सुप्रीम कोर्ट ने रोड सेफ्टी बॉडी बनाने के निर्देश दिए हैं। जिले में 62 डेंजर जोन एेसे हैं जहां लगातार हादसों में मौतें हो रही हैं। सेफ जोन बनाने के लिए कोर्ट ने सेफ्टी बॉडी बनाने के आदेश दिए, लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारी सेफ्टी बॉडी बनाना तो दूर, सड़क सुरक्षा समिति की बैठक तक नहीं कर रहे हैं। देश में हर 3 मिनट में सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत होने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकार को रोड सेफ्टी बॉडी बनाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के साथ यह भी कहा है कि रोड सेफ्टी के लिए केन्द्र व राज्य सरकार पॉलिसी तैयार करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोका जा सके। सेफ्टी बॉडी में स्वास्थ्य, पुलिस, परिवहन, ट्रैफिक और पीडब्ल्सयूडी विभाग के अधिकारियों में शामिल किया जाएगा। सेफ्टी बॉडी के सदस्यों को सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने देश के 9 केन्द्र शासित व राज्य सरकारों को 31 जनवरी 2018 तक रोड सेफ्टी पॉलिसी बनाकर लागू करने के आदेश दिए हैं। जिले में 62 डेंजर जोन हैं, जहां लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। इन स्थानों में कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं।
किसकी क्या जिम्मेदारी : पीडब्ल्यूडी- सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुरूप सड़कों को दुरुस्त करना, रफ्तार रोकने ब्रेकर का निर्माण, अंधे मोड़ पर संकेत बोर्ड लगाना।
आरटीओ- वाहनों की फिटनेस की जांच के लिए चौकियों में जांच करना, बिना परमिट और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करना, भारी वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकते हुए बाइपास से डायवर्ट करना।
पुलिस- डेंजर जोन के आसपास जिगजैग ड्रम लगाना, बाइपास से रात्रि में वाहनों को डायवर्ट करना, नशा कर वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई करना।
ट्रैफिक- शहर के भीतर 40 किलो मीटर प्रतिघंटे से अधिक रफ्तार से चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई, बिना हेलमेट वाहन चलाको पर कार्रवाई, शहर में भारी वाहनों का प्रवेश रोकना।
स्वास्थ्य विभाग- डेंजर जोन के आसपास प्रथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व स्टॉफ की व्यवस्था करना, सामुदायिक व प्रथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में समुचित उपचार की व्यवस्था, दुर्घटना होने पर पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर घायलो को उपचार करना।
3 साल में 3300 हादसे, 713 की मौतें : सड़क हादसे के आंकड़े चौकाने वाले हैं। पिछले 3 साल में जिले में 3300 सड़क हादसों में 713 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। साथ ही 2500 से अधिक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
शहर के डेंजर जोन- नेहरू चौक, डीआईजी तिराहा, महामाया चौक, जरहाभाठा मंदिर चौक, तिफरा मुख्य मार्ग तिराहा, मोपका तिराहा, मंगला चौक।
मस्तूरी- दर्रीघाट, लावर, किरारी, मस्तूरी मुख्य मार्ग, कोहरौदा, रिस्दा, गतौरा, जयराम नगर, भदौरा, कर्रा, कछार, खैरा, परसदा।
बिल्हा - मूढ़ीपार, झाल रोड, महुआ चौक।
रतनपुर- रानीगांव चौक,महामाया चौक,मदनपुर मुख्य मार्ग, लखराम मोड़, खंडोबा-सांधीपारा बाइपास, जालीमोड़, खूंटाघाट मोड़, बगदेवा मार्ग।
हिर्री- पेण्ड्रीडीह बाइपास, अमसेना चौक, भेजपुरी मोड़, मोहदा मोड़, बोड़सरा स्कूल, बेलमुंडी स्कूल, पेझडीडीह स्कूल।
कोटा-अमने मोड़, लोरमी नाका।
तखतपुर- नया बस स्टैण्ड, जरौधा मोड़, जरेली मोड़, लिदरी मोड़, बेलसरी मोड़।
पचपेड़ी- गोड़ाडीह- लावर मार्ग, मचहामोड़, जैतपुरी मोड़।
चकरभाठा- सरवानी मुख्य मार्ग, सकरी पेण्ड्रीडीह बाइपास पर सलमपुर मोड़, संबलपुर मोड़, बटालियन मोड़ , चकरभाठा कैप मोड़, छतौना मोड़।
सरकण्डा- आरके नगर चौक, लोधीपारा, पशुपालन विभाग कार्यालय मुख्य मार्ग, चिल्हाटी मोड़, लगरा मुख्य मार्ग।
सिविल लाइन - मंगला चौक, उसलापुर रोड स्थित पेट्रोल पंप तिराहा, संजय तरण पुष्कर तिराहा, वेयर हाउस रोड तिराहा।
नहीं मिला सहयोग तो पुलिस ने बनवाए जनसहयोग से ब्रेकर
सड़क हादसों को रोकने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने अब तक कोई पहल नहीं की है। जिले में सड़क हादसों की मुख्य वजह तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों से है। पुलिस ने हादसों को रोकने के लिए जिले के कई डेंजर जोन में जनसहयोग से ब्रेकर बनवाए हैं। ब्रेकर ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुरूप नहीं बने हैं।
Published on:
15 Dec 2017 11:43 am
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