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4 बच्चों की डूबने से मौत, परिजनों को मिला 4-4 लाख रुपए मुआवजा… मुख्य सचिव ने शपथपत्र में हाईकोर्ट को दी जानकारी

Bilaspur High Court: हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले में तालाब में नहाने गए भाई-बहन समेत 4 बच्चों की डूबने से हुई मौत के मामले को संज्ञान में लिया है। मुख्य सचिव से शपथपत्र पर जवाब मांगा गया था।

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हाईकोर्ट (Photo Patrika)

हाईकोर्ट (Photo Patrika)

CG High Court: हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले में तालाब में नहाने गए भाई-बहन समेत 4 बच्चों की डूबने से हुई मौत के मामले को संज्ञान में लिया है। मुख्य सचिव से शपथपत्र पर जवाब मांगा गया था। सचिव ने जवाब में कहा है कि मृत बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। इसके साथ ही व्यवस्था की जा रही है कि इस तरह की दुर्घटना फिर से ना हो।

जानें क्या है पूरा मामला

जांजगीर-चांपा जिले में स्कूल से लौटते वक्त तालाब में नहाने गए भाई बहन समेत 4 बच्चों की डूबकर मौत हो गई थी। घटना बलोदा थाना क्षेत्र के भैंसतरा गांव की थी। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और बिभु दत्त गुरु की बेंच में जनहित याचिका के रूप में सुनवाई हुई। जिसमें मुख्य न्यायाधीश ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कितनी गलत बात है, कि स्कूल से लौटते वक्त 4 बच्चे पानी में डूब जाते हैं। यह सरकार की भी जिम्मेदारी है कि बच्चे सुरक्षित घर पहुंचे।

वही कांकेर में प्रकाशित एक अन्य खबर पर भी कोर्ट ने संज्ञान लिया है जिसमें स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालते हुए नाला पार कर स्कूल जाने की मजबूरी की जानकारी दी गई थी। कांकेर के मामले में सरकार ने कहा कि पुलिया बनाने का प्रस्ताव बना लिया गया है और जल्द ही पुलिया बना ली जाएगी।

एम्बुलेंस नहीं मिलने से मौत के मामले में हाईकोर्ट सख्त

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एंबुलेंस सेवा की लापरवाही से हुई दो मौतों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गरीब आदिवासी की मौत पर राज्य सरकार को दो लाख रुपए और ट्रेन में कैंसर पीड़िता की मौत पर रेलवे को एक लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा, एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचना और बाद में शव वाहन के लिए घंटों इंतजार कराना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।