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शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप साबित नहीं, हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर आरोपी की बरी बरकरार रखी

High Court: शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप से जुड़े मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को मिली बरी को बरकरार रखा है।
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Bilaspur High Court

Bilaspur High Court: (photo-patrika)

CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को मिली बरी को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि महिला यह साबित नहीं कर पाई कि आरोपी ने धोखे से उसे वैध पत्नी होने का विश्वास दिलाया था। इस आधार पर अपील खारिज कर दी गई। यह फैसला जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनाया।

जानें पूरा मामला

राजनांदगांव जिले की रहने वाली महिला ने अपने परिचित पर आरोप लगाया था कि 8 मई 2008 को उससे विवाह किया गया और बाद में एक इकरारनामा भी बनाया गया। महिला का कहना था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए और घूमने-फिरने के दौरान उससे करीब 85 हजार रुपये भी खर्च कराए। बाद में पैसे देने से इनकार करने पर उसे घर से निकाल दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2022 को आरोपी को बरी कर दिया था।

कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए

कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि, महिला की शुरुआती शिकायत और नोटिस में विवाह होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। बाद की शिकायत में उसने खुद लिखा कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। महिला को पहले से पता था कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसकी पत्नी भी जीवित है। कथित इकरारनामा पहले ही सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा अवैध घोषित किया जा चुका है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में धारा 493 आईपीसी के तहत अपराध साबित करने के लिए यह जरूरी है कि आरोपी ने धोखे से महिला को यह विश्वास दिलाया हो कि वह उसकी वैध पत्नी है। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।

धोखे का तत्व नहींं हुआ साबित

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि, दोनों पक्षों को पता था कि वे कानूनी रूप से पति-पत्नी नहीं हैं। किसी प्रकार की वैध शादी की रस्म या कानूनी प्रक्रिया सिद्ध नहीं हुई। सिर्फ बाद में छोड़ देना या संबंध खत्म करना, अपने आप में धोखा साबित नहीं करता।

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