
बिलासपुर .
तीसरी बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई बीजेपी के विधायक अब निरकुंश हो चले हैं। विधायक ही नहीं बल्कि कई ऐसे छुटभैय्ये नेता भी हैं, जो पार्टी का खास होने का दंभ भरकर रंगदारी भी वसूल करते हैं। उनके खिलाफ थानों में कई प्रकरण दर्ज हैं। होली के दिन पिता की रसूख के दम पर बेटे ने थानेदार से गाली गलौज कर धमकी दे डाली। थानेदार की कार में तोडफ़ोड़ कर दी। विधायक पिता थाने से आरोपियों को छुड़ा ले गए। मामले ने जब राजनैतिक तूल पकड़ा तो पुलिस ने आनन फानन में आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया, और फिर मुचलका पर रिहा भी कर दिया। अब पुलिस मामले को सिर्फ गाली-गलौज और तोडफ़ोड़ तक ही समेटने लगी है।
संसदीय सचिव विधायक राजू सिंह क्षत्री और उनके बेटे विक्रम प्रताप सिंह अपने समर्थकों को थाने से बलपूर्वक छुड़ा ले गए। थाना प्रभारी वायएन शर्मा के घर में खड़ी उनकी कार (सीजी १० एचके ९९३६) में तोडफ़ोड़ कर दी। उनसे फोन पर गाली गलौज कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। घटना के सामने आने के बाद राजनैतिक गलियारे में जहां हड़कम मचा हुआ है। विरोधी दल संसदीय संचिव और उनके बेटे की गिरफ्तरी की मांग कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ चंद्रपुर विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव ने फेसबुक पर कमेंट पोस्ट कर तखतपुर विधायक और उनके बेटे के इस कृत्य को पुरुषार्थ कहकर उनके पक्ष में समर्थन दिया है। उनका कहना है कि राजू क्षत्री मर्द हैं, और मर्द को अगर कोई छेड़ेगा तो वह पुरूषार्थ करेगा ही। साथ ही अधिकारियों को मर्दों से दूर रहने की सलाह भी दी है। पूरे पोस्ट में चंद्रपुर विधायक युद्धवीर सिंह पुरूषार्थ का मतलब गुंडागर्दी होता है, यही समझाने का प्रयास कर रहे हैं। राजनैतिक आकाओं के मुंह से निकले शब्द को आदेश मानकर जी हुजूरी करने की राय भी देते नजर आ रहे हैं। यह राजनैतिक दवाब का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई नेता और उनके समर्थक भी ऐसे कारनामें को अंजाम दे चुके हैं।
आरोपी को विधायक और उसके बेटे ने नहीं ले गए, पुलिस ने छोड़ा!: थाने के स्टाफ और फोन की रिकार्डिंग वायरल से स्पष्ट है कि संसदीय सचिव राजू क्षत्री और उसके बेटे विक्रम प्रताप थाने में धुसकर आरोपियों को अपने साथ ले गए। जबकि एसडीओपी कोटा का तर्क है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ कोई मामला दर्ज ही नहीं किया। केवल १०७/११६ की कार्रवाई कर समझाइश देकर छोड़ा गया था। विधायक राजू क्षत्री ने कहा जरूर था, लेकिन उनके कहने पर नहीं छोड़ा गया।
गिरफ्तारी के बाद तुरंत मुचलका जमानत पर थाने से छोड़ दिया: तत्कालीन थाना प्रभारी वायएन शर्मा की कार में तोडफ़ोड़ और फोन पर गाली गलौज करने के मामले में तखतपुर पुलिस ने मंगलवार को विधायक पुत्र विक्रम प्रताप सिंह क्षत्री को पुस्तैनी मकान सालहे डबरी से गिरफ्तार किया। मामले के अन्य आरोपियों को उनके घर पर दबिश देकर गिरफ्तार किया गया। इनमें संतोष पिता रमेश साहू पकरिया निवासी, सरोज कुमार पिता पंचराम साहू पकरिया निवासी, छन्नू सिंह ठाकुर पिता कल्याण सिंह निवासी पकरिया और रंजित सिंह पिता राधे सिंह पकरिया निवासी शामिल हैं। सभी को धारा २९४, ५०७, 427 व १४७ के तहत गिरफ्तार किया गया है।
समर्थकों को छुड़ाने किसी भी हद तक चले जाते हैं नेता: पांच साल पहले सिविल लाइन थाने के सामने वाहन चेकिंग के दौरान एक महिला आरक्षक से भाजपा नेता और जूदेव के समर्थक शुशांत शुक्ला ने बदसलूकी की थी। घटना ने तूल पकड़ा तो भाजपा नेता अण्डर ग्राउंड हो गया। तत्कालीन एसपी अजय यादव के तबादले के बाद ही शुशांत शहर लौटा। तब तक मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। दूसरा मामला नेहरू चौक में हुआ जब भाजपा नेता आदित्य तिवारी ने बिना नम्बर प्लेट की गाड़ी छुडाने को लेकर यातायात थाने के सामने जमकर हंगामा मचाया था।
तत्कालीन थाना प्रभारी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विधायक राजू सिंह क्षत्री के पुत्र विक्रम ङ्क्षसह और अन्य चार को गिरफ्तार किया गया है। तोडफ़ोड़ का मामला था। विधायक किसी को साथ नहीं ले गए। बल्कि उन आरोपियों को पुलिस ने १०७-११६ की कार्रवाई के बाद समझाइश देकर छोड़ा था। जांच में विधायक राजू ङ्क्षसह क्षत्री के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले।
- विश्व दीपक त्रिपाठी, एसडीओपी, कोटा
विधायक द्वारा अगर इस तरह का पोस्ट किया गया है तो यह चिंतनीय विषय है। जनप्रतिनिधि पर सभी की जवाबदेही होती है। जिस तरह विधायक के बेटे ने थाना प्रभारी की गाड़ी में तोडफ़ोड़ की, गलत है। किसी विधायक द्वारा इस तरह का बयान पोस्ट करना किसी भी सूरत में अच्छा नहीं है। बिहार सुधर रहा है, लेकिन यहां के बेलगाम नेता छत्तीसगढ़ को बिहार बनाने में लगे हुए हैं।
- नरेन्द्र बोलर, शहर अध्यक्ष कांग्रेस
Published on:
07 Mar 2018 01:12 am
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