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सोते-सोते हो गई आशा भोसले की मौत, 12 दिन बाद पोते चिन2 भोसले का खुलासा, बोले- कोई दर्द नहीं

Asha Bhosle Grandson On Her Death: चिन2 भोसले ने हाल ही में दादी आशा भोसले के निधन के 12 दिन बाद बात की है। उन्होंने आखिरी पलों को याद करते हुए क्या कुछ कहा है, चलिए जानते हैं।

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Asha Bhosle Grandson On Her Death

Asha Bhosle Grandson On Her Death (सोर्स-एक्स)

Asha Bhosle Grandson On Her Death: भारतीय संगीत जगत की महान गायिका आशा भोसले के निधन की खबर ने देशभर के संगीत प्रेमियों को गहरा झटका दिया। 92 साल की उम्र में उनका जाना एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है। अब उनके पोते चिन2 भोसले ने परिवार की ओर से उनके आखिरी पलों को लेकर भावुक खुलासा किया है।

उन्होंने बताया कि आशा भोसले ने इस दुनिया को नींद में ही बिना किसी दर्द के अलविदा कह दिया। जी हां आशा भोसले के निधन के 12 दिन बाद उनके पोते चिन2 ने खुलासा किया है। क्या कुछ कहा है चिन2 ने, चलिए जानते हैं।

चिन2 भोसले ने किया खुलासा (Asha Bhosle Grandson On Her Death0

चिन2 भोसले ने 'स्क्रीन' के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी दादी से आखिरी बातचीत उनके निधन से तीन-चार दिन पहले हुई थी। उस दौरान दोनों साथ बैठकर आम खा रहे थे और अंतरराष्ट्रीय हालात, खासतौर पर ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव पर चर्चा कर रहे थे। चिन2 के मुताबिक, आशा भोसले आखिरी समय तक दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती थीं और मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय थीं।

मराठी नाटक देखने भी गई थीं आशा भोसले

उन्होंने बताया कि निधन से ठीक एक दिन पहले आशा भोसले तीन घंटे लंबा एक मराठी नाटक देखने भी गई थीं। इतना ही नहीं, वहां मंच पर जाकर उन्होंने कलाकारों को कला और संस्कृति को जिंदा रखने की प्रेरणा भी दी। इससे साफ झलकता है कि जीवन के अंतिम दिनों तक उनका जुड़ाव संगीत और रंगमंच से उतना ही मजबूत था जितना हमेशा रहा।

चिन2 ने भावुक होकर कहा कि जब परिवार ने उन्हें अस्पताल ले जाने की बात कही, तो उन्होंने आराम करने की इच्छा जताई और थोड़ी देर सोने की बात कही। इसके बाद ही वो हमेशा के लिए शांत हो गईं। परिवार के मुताबिक, उन्होंने जीवन उसी तरह जिया जैसा वह चाहती थीं और विदा भी उसी तरह ली।

'जनाई भोसले इस समय काफी दुखी हैं'

परिवार इस कठिन समय में उनके जाने के दुख को सहते हुए उनकी यादों और विरासत को संजोने की कोशिश कर रहा है। चिन2 ने बताया कि उनकी बहन जनाई भोसले इस नुकसान से बेहद आहत हैं, क्योंकि दोनों के बीच बहुत गहरा रिश्ता था। बचपन से लेकर करियर तक आशा भोसले ने जनाई का मार्गदर्शन किया और दोनों ने कई मंचीय प्रस्तुतियां साथ दी थीं।

उन्होंने ये भी बताया कि परिवार अब नियमित रूप से साथ बैठकर भोजन करता है और उनके जीवन से जुड़ी यादों को साझा करता है। आशा भोसले का संघर्षपूर्ण जीवन आज भी परिवार के लिए प्रेरणा बना हुआ है। अपने जीवन में उन्होंने निजी तौर पर कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन हमेशा मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहीं।

12 अप्रैल को आशा भोसले का हुआ निधन

बताया गया कि 11 अप्रैल को उन्हें दिल और सांस से जुड़ी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 12 अप्रैल को उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए घर पर रखा गया और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बाद में परिवार ने वाराणसी जाकर गंगा नदी में उनकी अस्थियां विसर्जित कीं।

आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में आशा भोसले ने कई भाषाओं में हजारों गीत गाकर भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया था। संगीत जगत में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।

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