
70 के दशक की 'टुन टुन' याद है आपको, परिवारवालों की हत्या के बाद घर से भागकर मुंबई आ गई थीं; फिर ऐसे मिला फिल्मों में काम
बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई स्टार्स ऐसे हैं, जो अपने दौर से लेकर अब तक कहीं न कहीं लोगों के जहन और यादों में बसे हुए हैं. भले ही आज वो हमारे बीच हो या ना हो, लेकिन फिर भी उनकी कुछ धुंधली-धुंधली यादें मौजूद है. वैसे तो आज के दौर में इंडस्ट्री में मेल कॉमेडियन्स काफी तादात में हैं, लेकिन फीमेल कॉमेडियन के कुछ ही नाम जहन में मौजबद होंगे. आज हम आपको बॉलीवुड की पहली फीमेल कॉमेडियन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको शायद आप सभी जानते होंगे, क्योंकि उनकी शख्सियत ही कुछ ऐसी ही.
आप सभी को टुन टुन (Tun Tun) याद हैं, जो फिल्मों के जरिए आप सभी के चेहरे पर मुस्कान ले आया करती थीं. जी हां, वहीं मोटी सी एक्ट्रेस जिनकी दमदार एक्टिंग और कॉमेडी से फिल्म का मजा चारगुणा बढ़ जाता था. टुन टुन ने 40 से 70 के दशक तक बॉलीवुड पर राज किया है. उस दौर में ऐसी एक दो ही फिल्में होंगी, जिनमें उनका किरदार नजर नहीं देखने को मिला होगा. वरना हर फिल्म वो भले ही साइड एक्ट्रेस के तौर पर नजर आती थीं, लेकिन उनकी कॉमेडी फिल्म में आकर्षण का केंद्र हुआ करती थीं.
फिल्म में उनका छोटा सा किरदार ही लोगों के चहरे पर हंसी ले आता था. उन्होंने एक कॉमेडियन के तौर पर अपना खूब नाम कमाया. अपने बेहतरीन एक्सप्रेशन और कॉमिक टाइमिंग के चलते टुन टुन आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं, लेकिन ये बाद शायद ही उनके फैंस जानते होंकगे कि पर्दे पर सबको हंसाने वाली टुन टुन की असल ज़िंदगी बेहद दर्द भरी रही. टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था. उनका जन्म साल 1923 में उत्तरप्रदेश के अमरोहा में हुआ था. उन्होंने अपने जीवन में बचपन से काफी उतार-चढ़ाव देखे.
बताया जाता है कि टुन टुन जब छोटी थीं तभी उनके माता-पिता और भाई की हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या जमीनी विवाद के चलते कर दी गई थी. अपने एक इंडरव्यू के दौरान टुन टुन ने बताया था कि 'जब मैं ढाई साल की थी तो मेरी माता-पिता गुजर गए थे. इसके कुछ समय बाद मेरे भाई को भी मार दिया था और तब मेरी उम्र चार-पांच साल की थी'. परिवार का साथ छूटने के बाद उन्होंने बेहद गरीबी में अपने दिन काटे. किसी तरह वो वहां से भागकर मुंबई आईं.
यहां वह सीधे म्यूजिक कंपोजर नौशाद के घर पहुंचीं और उनसे कहा कि 'मैं गाना जानती हूं, आप मुझे काम दीजिए नहीं तो मैं समंदर में कूदकर अपनी जान दे दूंगी'. इसके बाद नौशाद ने उन्हें मौका दिया, लेकिन कुछ खास सफलता न मिलने पर नौशाद ने उन्हें एक्टिंग करने की सलाह दी और दिलीप कुमार की फिल्म 'बाबुल' में काम दिलवा दिया. यहीं से उनका नाम उमा देवी से टुन टुन पड़ गया और साल 2003 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
Updated on:
04 Apr 2022 12:06 pm
Published on:
04 Apr 2022 11:50 am
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