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OTT पर अब नहीं चलेगी CBFC की कैंची, फिर कैसे रोकेगी सरकार अगला India’s Got Latent विवाद?

Streaming Censor Board: OTT प्लेटफॉर्म्स पर अब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की सेंसरशिप का असर नहीं रहेगा, क्योंकि सरकार ने OTT कंटेंट के लिए अलग नियम की घोषणा की है।

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OTT पर अब नहीं चलेगी CBFC की कैंची, फिर कैसे रोकेगी सरकार अगला India’s Got Latent विवाद?

OTT पर अब नहीं चलेगी CBFC की कैंची( सोर्स: X)

Streaming Censor Board: OTT प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स, जियो हॉटस्टार और अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध ओवर-द-टॉप कंटेंट को लेकर एक बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है, जिसमें कंटेंट सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएगा। बता दें, केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में ये घोषणा की।

India’s Got Latent विवाद?

इतना ही नहीं, डॉ. मुरुगन ने बताया कि OTT प्लेटफॉर्म CBFC के दायरे में नहीं आते हैं। इसके बजाय, उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल मीडिया आचार संहिता नियम, 2021 के पार्ट III के तहत अलग से विनियमित किया जाएगा।

CBFC सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के तहत गठित एक कानूनी संस्था है। इसलिए, इसका अधिकार क्षेत्र केवल उन सिनेमैटोग्राफिक फिल्मों की जांच और प्रमाणन तक ही सीमित है जो थिएटरों में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए बनी हैं यानी सिर्फ थिएटर में रिलीज होने वाली फिल्मों पर ही CBFC का अधिकार चलता है। साथ ही, OTT प्लेटफॉर्म, डिजिटल माध्यम होने के कारण IT नियमों के तहत आते हैं।

OTT पर अब नहीं चलेगी CBFC की कैंची

इसका मतलब ये नहीं है कि नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, जियोहॉटस्टार और यूट्यूब जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बिना किसी निगरानी के चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 'इंडियाज गॉट लेटेंट' मामले में अश्लील जोक्स को लेकर उठाई गई FIR के बाद कमेंट की थी कि किसी को तो जवाबदेह होना ही चाहिए। इस पर डॉ. मुरुगन ने बताया कि IT नियम 2021 के तहत, OTT प्लेटफॉर्म को एक 'कोड ऑफ एथिक्स' का पालन करना होगा। इस कोड के तहत, उन्हें सरकार द्वारा प्रतिबंधित किसी भी तरह के गैर-कानूनी कंटेंट को प्रकाशित करने से बचना होगा। इतना ही नहीं, सभी शो और फिल्मों को निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार उम्र के आधार पर वर्गीकृत (age-classification) करना अनिवार्य होगा। बता दें, OTT कंटेंट से जुड़ी किसी भी शिकायत को सुलझाने के लिए एक तीन-लेवल शिकायत प्रणाली मौजूद है।

लेवल-I- इसमें 'सेल्फ-रेगुलेशन' शामिल है, जहां OTT प्लेटफॉर्म अपने स्तर पर शिकायतों का जवाब देते हैं।

लेवल-II- शिकायतें पहले हल नहीं होतीं, तो इंडस्ट्री के जरिए बनाई गई 'सेल्फ-रेगुलेटिंग बॉडी' उनकी निगरानी करती है।

लेवल-III- शिकायत इन दोनों सेल्फ-रेगुलेटिंग स्तरों पर भी हल नहीं हो पाती, तो इसे तीसरे और अंतिम स्तर पर ले जाया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार जवाब देगी।

अश्लील कंटेंट दिखाने के कारण बंद

मंत्री मुरुगन ने संसद में ये भी बताया कि सरकार ने अब तक भारत में 43 OTT प्लेटफॉर्म को अश्लील कंटेंट दिखाने के कारण बंद कर दिया है, क्योंकि ये कानून द्वारा वर्जित है।

ये तीसरा स्तर 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद में जब सवाल उठाई गई कि कैसे रोकेगी सरकार अगला ऐसा विवाद इस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जवाब आया, "जब गंदा मटीरियल अपलोड हो जाता है, तो जब तक अधिकारी रिएक्ट करते हैं, तब तक वो लाखों दर्शकों तक वायरल हो चुका होता है, तो आप इसे कैसे कंट्रोल करेंगे?" सुप्रीम कोर्ट ने उम्र के आधार पर क्लासिफिकेशन के साथ ज्यादा सख्ती से पालन पर भी जोर दिया था और यहां तक कि आधार कार्ड से उम्र वेरिफाई करने का भी सुझाव दिया था।

दरअसल, FICCI-EY मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री रिपोर्ट 2025 ने OTT प्लेटफॉर्म को "भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक पहुंच का एक मुख्य चालक है"। बता दें, भारत में OTT कंटेंट के सब्सक्राइबर की संख्या लगभग 9.5 करोड़ से 11.8 करोड़ के बीच है और 2024 में इस क्षेत्र का राजस्व 11% बढ़कर 9,200 करोड़ रुपये हो गया है। ये नए नियमों के तहत इस बढ़ते डिजिटल माध्यम को संतुलित तरीके से विनियमित करने के महत्व को दर्शाता है।

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