
चाइल्ड एक्टर मास्टर राजू की पुरानी फोटो (इमेज सोर्स: एक्टर इंस्टाग्राम)
Child Actor Master RajuStory: मुबंई के डोंगरी इलाके में रहने वाले मास्टर राजू का असली नाम फहीम अजानी था। उनके माता- पिता शुरुआत में उन्हें अभिनय नहीं करने देते थे, क्योंकि वह लोग इस फिल्मी दुनिया से परिचित नहीं थे। 5 साल की उम्र में गुलजार की फिल्म 'परिचय' (1972) में ऑडिशन ठीक नहीं होने की वजह से मास्टर राजू बहुत रोए। लेकिन गुलजार को उनका उम्र के हिसाब से व्यवहार पसंद आया और उन्होंने राजू को फिल्म में लेने का फैसला किया।
मास्टर राजू ने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, जितेंद्र, अनिल कपूर जैसे मशहूर सितारों के साथ काम करके कम उम्र में मुंबई के जाने माने बांद्रा इलाके में अपने परिवार के लिए घर खरीदा। पढ़ाई में ज्यादा समय देने की वजह से वे बड़े होकर वैसी सफलता नहीं पा सके जो बचपन में उन्हें मिली और खुद को एक प्रमुख सितारे के रूप में स्थापित करने में नाकाम रहे।
राजू ने सात साल की उम्र में 'खुशबू' फिल्म में काम किया था। फिल्म की लीड एक्ट्रेस हेमा मालिनी को उन्होंने लट्टू घुमाना सिखाया। धर्मेंद्र के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध थे। वे उनके साथ अपना टिफिन भी शेयर करते थे। राजू ने हेमा मालिनी और धर्मेंद्र के साथ 'ड्रीम गर्ल', 'नास्तिक', 'समाधि' और 'क्रोधी' जैसी फिल्में की।
रेडिफ के साथ एक पुराने इंटरव्यू में राजू ने बताया था कि पहले लोग उन्हें गुड्डू कहते थे। लेकिन 'परिचय' फिल्म के दौरान संजीव कुमार ने मुझे राजू बुलाना शुरू किया। वह कहते थे कि राजू नाम ही बेहतर है, जो 70 के दशक में हर घर में गूंजने लगा।
फिल्म 'परिचय' में अभिनय करने के बाद राजू को कई किरदार मिलने लगे। उन्होंने यश चोपड़ा, हृषिकेश मुखर्जी और बसु चटर्जी जैसे डायरेक्टरों के साथ काम किया। कई हिट फिल्में जैसे 'अमर प्रेम', 'दाग-द पोएम ऑफ लव', 'दीवार', 'इंकार', 'खुद-दार' और 'वो सात दिन' में काम किया।
एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका शूटिंग शेड्यूल बहुत व्यस्त रहता था। वह एक साथ तीन फिल्मों की तीन शिफ्टों में शूटिंग करते थे। वो हर समय काम करते थे, फिर भी उन्हें महसूस नहीं हुआ की उनका शोषण हो रहा है। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई जब उन्हें चितचोर (1976) में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
बाद में पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए राजू ने फिल्मों से ब्रेक लिया। जब वापस आए तो नेगेटिव रोल शुरू करने लगे। वे 'अच्छे लड़के' जैसे किरदार निभाते हुए थक गए थे। उन्होंने शो 'चुनौती' और महेश भट्ट की 'साथी' में ड्रग एडिक्ट का किरदार भी निभाया था। जिससे उनकी यही छवि बन गई थी।
1973 में अपनी पहली फिल्म रिलीज होने के एक साल बाद उन्हें प्रति फिल्म 10 हजार रुपए मिलते थे। इंडस्ट्री में चार साल फिल्मों में काम करने के बाद उनकी सैलरी 1 लाख रुपये प्रति फिल्म हो गई। 6-7 साल की उम्र में ही बांद्रा में 1.10 लाख रुपये का घर खरीदा था। उनके पिता ने उनकी संपत्ति को समझदारी से इस्तेमाल किया। कहते थे कि वो कभी बुरे दौर से नहीं गुजरे।
मास्टर राजू को जब एक्टर के रूप में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने साइड एक्टर का रोल करने लगे। जैसे लीड हीरो का सबसे अच्छा दोस्त। फिल्म बागी (1990) में सलमान के दोस्त का किरदार निभाया। बाद में उन्हे अनाड़ी, बलवान, साजन चले ससुराल और दिलजले जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार मिले, लेकिन फिर भी अच्छे एक्टर नहीं बन पाए। इसकी वजह से मास्टर राजू
टेलीविजन की ओर चले गए और लगभग 3000 एपिसोड में ‘नारद’ का रोल निभाया। उन्होंने जय हनुमान, नवग्रह पुराण, दर्शन दो भगवान, जय मां दुर्गा और शनि महिमा जैसे धारावाहिकों में किरदार निभाया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता वैसे-वैसे उनकी लोकप्रियता कम होती गई। आज एक्टर सोशल मीडिया के जरिए अपनी खोई हुई पहचान पाने की कोशिश में जुटे हैं! सोशल मीडिया पर अक्सर वह पुरानी फिल्मों के सीन या फिर फोटो शेयर करते रहते हैं।
Updated on:
29 Nov 2025 08:49 pm
Published on:
29 Nov 2025 08:49 pm
