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Interview: पुरुषों की तरह लड़कियों के लिए भी होनी चाहिए आजादी: फरहान

पुरुषों की तरह लड़कियों के लिए भी होनी चाहिए आजादी: फरहान
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Dilip Chaturvedi

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Updated: 17 Nov 2017, 3:49 PM IST

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अभिनेता फरहान अख्तर फिल्मों के साथ सोशल कॉज में भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने बॉलीवुड के साथ साथ समाज में यौन उत्पीडऩ, घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों से लोगों को जागरूक करने के लिए एक प्लेटफॉर्म स्थापित किया है। इसका नाम है मर्द फाउंडेशन। इससे जुड़कर फरहान लोगों को अवेयर कर रहे हैं। हाल ही फरहान से बातचीत करने का मौका मिला और हमने उनसे इस अभियान के बारे जाना...

आपने किस मकसद से इस अभियान (मर्द) को शुरू किया?
मैंने 2013 में इस अभियान को शुरू किया था। भयावह निर्भया घटना के बाद काफी अधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया हुई थी। मुझे यह महसूस हुआ कि इस तरह की हर घटना के बाद मेरे और मेरे दोस्त के भीतर जो गुस्सा पनपता था, वो हमारे कमरे तक ही सिमट कर रह जाता था। मुझे लगा कि अगर मैंने इस गुस्से और चिंता को आगे नहीं बढ़ाया, तो फिर सब बेकार है, इसलिए मैंने मर्द अभियान शुरू किया। ये एक ऐसी पहल है, जो एक ऐसे समाज की हमारी चिंता को संबोधित करती है, जो पुरुषों और महिलाओं के लिए सुरक्षित हो। जैसे हम पुरुषों को रात में बाहर जाने या फिल्म देखने की स्वतंत्रता है, उसी तरह की आजादी लड़कियों के लिए भी होनी चाहिए। मर्द की शुरुआत के पीछे का मुख्य उद्देश्य पुरुष, विशेष रूप से युवाओं की विचार प्रक्रिया को बदलना था।

अब तक लोगों की समग्र प्रतिक्रिया क्या रही है?
लोगों की प्रतिक्रिया बहुत सकारात्मक है। 4 साल हो चुके है। हम विभिन्न कॉलेजों के बहुत से छात्रों से जुड़े और हमने देखा है कि उनके विचार प्रक्रिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस अभियान के अलावा, बहुत से एनजीओ हैं, बहुत से लोग है, जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला है। हालांकि, इसे लेकर जो बदलाव होना चाहिए वो पर्याप्त नहीं है। हम इस मकसद को पूरी तरह हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और आगे भी काम करते रहेंगे।

क्या इस तरह की घटना फिल्म उद्योग में भी होती है और यदि हां तो फिल्म उद्योग इससे कैसे निपटता है?
मुझे लगता है कि फिल्म उद्योग की प्रकृति अलग है, इसके बावजूद अगर कोई इस तरह की हिंसा या उत्पीडऩ का शिकार होता है, तो उसे सामने आकर, खुलकर बोलना चाहिए. मैं उनमें से हूं, जिसकी ऐसी आवाज सुनने में दिलचस्पी है। हालांकि, मैं ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं जानता, जिसके साथ ऐसा हुआ।

सोशल मीडिया पर यह अभियान शुरू किया गया और सोशल मीडिया ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, ग्रामीण पृष्ठभूमि से ऐसे कई लोग हैं, जो सोशल मीडिया का ज्यादा उपयोग नहीं करते हैं। ऐसे लोगों तक पहुंचने की आपकी क्या योजना है?
यह हमारे अभियान का पहला साल है और यह पहली बार है कि फिरोज अब्बास खान, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया और मैं एक साथ आए हैं। यह अभियान धीरे-धीरे सामने आएगा। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा शुरू किया गया शो 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' पहले से ही ऐसे दर्शकों तक पहुंच गया है और उनका संदेश जनता तक पहुंच गया हैं। ये शो रेडियो पर भी प्रसारित होता है। हम संचार के सभी उपलब्ध तरीकों का उपयोग करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं। हम 21 नवंबर को मुंबई में अपने कॉंसर्ट 'ललकार' का आयोजन करेंगे। हम और अधिक से अधिक ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में संगीत समारोहों का आयोजन करेंगे, जिनके पास टेलीविजन और इंटरनेट तक पहुंच नहीं है।

पुरुषों के लिए आपका क्या संदेश है?
मैं उन सभी लोगों से कहना चाहता हूं कि 'ललकार' के माध्यम से दिए जा रहे संदेश को सुनें और इस अभियान में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाएं।