
राजेश खन्ना को कैसे मिला सुपरस्टार का टैग?
Rajesh Khanna Superstar Tag: हिंदी सिनेमा के इतिहास में सुपरस्टार तो कई हुए, लेकिन 'सुपरस्टार' शब्द जिस एक शख्सियत के लिए ईजाद किया गया, वो थे राजेश खन्ना। आज के दौर में जहां सोशल मीडिया और पीआर टीमें किसी को भी स्टार बना देती हैं, वहीं 1960 और 70 के दशक में राजेश खन्ना ने जो दीवानगी देखी, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजेश खन्ना के नाम के आगे यह 'सुपरस्टार' का टैग आखिर लगा कैसे? हाल ही में एक पुराने वीडियो ने इस दिलचस्प राज से पर्दा उठाया है। जिसे सुनकर हर कोई हैरान हो रहा है।
राजेश खन्ना के पब्लिसिटी एजेंट रहे तारक नाथ गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में तारक नाथ बताते हैं कि उन्होंने जानबूझकर राजेश खन्ना की ब्रांडिंग शुरू की थी। वह कहते हैं, "हम जब भी प्रेस को कोई खबर भेजते, तो राजेश खन्ना के नाम के आगे हमेशा 'सुपरस्टार राजेश खन्ना' लिखते थे। उस वक्त कई पत्रकार चिढ़ जाते थे। वह पूछते थे कि हम ऐसा क्यों लिखें? तब उन्हें मनाने के लिए कभी प्यार से बात करनी पड़ती, तो कभी डिनर और तोहफों का सहारा लेना पड़ता था।"
तारक नाथ का मानना था कि जब एक ही बात बार-बार दोहराई जाती है, तो वह सच बन जाती है। हालांकि, फैंस इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि पीआर तो एक जरिया था, लेकिन राजेश खन्ना ने जो करके दिखाया, वो सिर्फ मार्केटिंग के दम पर मुमकिन नहीं था।
राजेश खन्ना का असली जादू 1969 में फिल्म 'आराधना' के साथ शुरू हुआ। 'मेरे सपनों की रानी' और 'रूप तेरा मस्ताना' जैसे गानों ने उन्हें रातों-रात नेशनल क्रश बना दिया। इसके बाद जो हुआ, वो फिल्मी दुनिया के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। 1969 से 1971 के बीच राजेश खन्ना ने लगातार 17 सुपरहिट फिल्में दीं। 'आनंद', 'कटी पतंग', 'सफर', 'अमर प्रेम' और 'हाथी मेरे साथी' जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉक्स ऑफिस का बेताज बादशाह बना दिया। फिल्म 'आनंद' में उनके अभिनय को आज भी अभिनय की पाठशाला माना जाता है।
राजेश खन्ना की स्टारडम सिर्फ नंबरों तक सीमित नहीं थी। उनके लिए लड़कियों की दीवानगी ऐसी थी कि वह अपनी सफेद कार से जहां से गुजरते, लड़कियां उसे चूमकर लिपस्टिक के निशानों से लाल कर देती थीं। कई महिला प्रशंसक उन्हें खून से खत लिखती थीं और उनकी फोटो से शादी तक कर लेती थीं। भीड़ उन्हें देखते ही बेकाबू हो जाती थी, और इसी पागलपन ने उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला असली 'सुपरस्टार' और सबका प्यारा "काका" बनाया। आज भले ही सिनेमा बदल गया हो, लेकिन राजेश खन्ना जैसा उन्माद दोबारा कभी देखने को नहीं मिला।
Updated on:
29 Apr 2026 01:51 pm
Published on:
29 Apr 2026 01:26 pm
बड़ी खबरें
View Allबॉलीवुड
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
