
Kunal Kemmu On Working Hours Debate (सोर्स- एक्स)
Kunal Kemmu On Working Hours Debate: इन दिनों बॉलीवुड में काम के घंटे और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। इसी मुद्दे पर अभिनेता कुणाल खेमू ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम के दबाव, कलाकारों की अपेक्षाओं और प्रोड्यूसर्स की जिम्मेदारियों को लेकर खुलकर बात की।
दरअसल हाल ही में दीपिका पादुकोण द्वारा फिल्मों में आठ घंटे की शिफ्ट की मांग को लेकर काफी चर्चा हो रही है। खबरें सामने आई थीं कि इसी वजह से उन्हें कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर होना पड़ा। इसी मुद्दे पर अब कुणाल खेमू ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि हर पेशे के साथ कुछ चुनौतियां और अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
एक बातचीत के दौरान कुणाल खेमू ने कहा कि जब कोई व्यक्ति बड़ा होकर अपने करियर का चुनाव करता है, तो उसे उस क्षेत्र की मांगों को भी समझना चाहिए। उनका मानना है कि कई बार लोग किसी पेशे के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को स्वीकार करने में हिचकते हैं।
उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी काम के बीच में आकर ये कहे कि उसे ज्यादा पैसा चाहिए लेकिन काम कम करना है, तो ये व्यवहारिक नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार किसी भी पेशे में सफलता पाने के लिए मेहनत और समय दोनों देना पड़ता है। उन्होंने यहां तक कहा कि कोई भी अचानक से तो मां नहीं बनता। इसके बाद बहुत सारे लोग उनके बयान को सीधे-सीधे दीपिका पादुकोण से जोड़कर देख रहे हैं।
कुणाल खेमू ने नई पीढ़ी यानी जेन-जेड के काम करने के तरीके पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग बेहतर जीवनशैली चाहते हैं, घूमना-फिरना चाहते हैं और निजी जीवन के लिए भी पर्याप्त समय चाहते हैं।
हालांकि उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति कम समय काम करता है और कोई दूसरा व्यक्ति ज्यादा मेहनत करता है, तो स्वाभाविक रूप से उनकी कमाई और परिणामों में भी अंतर होगा। ऐसे में मेहनत और परिणाम के बीच संतुलन को समझना जरूरी है।
कुणाल खेमू का मानना है कि अगर कलाकार अपने काम के घंटे पर ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं तो उन्हें प्रोडक्शन की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। यानी कलाकार चाहें तो खुद निर्माता बनकर अपने प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकते हैं।
उनका कहना था कि जब आप खुद निर्माता बनते हैं और अपनी पूंजी लगाते हैं, तब आपको समझ आता है कि किसी फिल्म को समय पर पूरा करना कितना जरूरी होता है। अगर शूटिंग के घंटे कम कर दिए जाएं तो फिल्म की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं।
इस बातचीत के दौरान करियर और परिवार से जुड़े फैसलों पर भी चर्चा हुई। कुणाल खेमू ने कहा कि जीवन के बड़े फैसले, जैसे परिवार शुरू करना या माता-पिता बनना, अक्सर सोच-समझकर लिए जाते हैं। ऐसे फैसलों के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं।
उन्होंने ये भी साफ किया कि ये मुद्दा केवल महिलाओं से जुड़ा नहीं है। उनके मुताबिक करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दरअसल दीपिका पादुकोण द्वारा फिल्मों में आठ घंटे की शिफ्ट की मांग करने की खबरों के बाद इंडस्ट्री में यह बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी मुद्दे के कारण वो 'स्पिरिट' और 'कल्कि 2898 एडी' के सीक्वल जैसे प्रोजेक्ट्स से अलग हो गईं।
हालांकि दीपिका का कहना है कि उनकी मांग असामान्य नहीं है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि कई कलाकार पहले से ही सीमित घंटों में काम करते हैं और यह कोई नई बात नहीं है।
Updated on:
06 Mar 2026 07:14 pm
Published on:
06 Mar 2026 07:13 pm
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