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हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों से हो रही सोहा अली खान की बेटी की परवरिश, कुणाल खेमू बोले- किताब या समाज के बनाए नियमों पर नहीं चले

Kunal Khemu On Raising Daughter With Soha Ali Khan: अभिनेत्री सोहा अली खान के साथ एक्टर कुणाल खेमू ने बेटी की परवरिश को लेकर हाल ही में बयान दिया है। क्या कुछ कहा है कुणाल ने, चलिए जानते हैं।
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Kunal Khemu On Raising Daughter With Soha Ali Khan

Kunal Khemu On Raising Daughter With Soha Ali Khan (सोर्स- @sakpataudi)

Kunal Khemu On Raising Daughter With Soha Ali Khan: बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे हैं जिन्होंने अलग-अलग धर्म और संस्कृतियों के बीच रिश्ते बनाए और उन्हें खूबसूरती से निभाया। अभिनेता कुणाल खेमू और अभिनेत्री सोहा अली खान भी उन चुनिंदा कपल्स में शामिल हैं, जिनकी शादी को एक दशक से ज्यादा का समय हो चुका है। दोनों अक्सर अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू के साथ बिताए गए खूबसूरत पलों को साझा करते रहते हैं। हाल ही में कुणाल ने अपनी बेटी की परवरिश को लेकर खुलकर बात की और बताया कि उन्होंने कभी समाज की सोच या लोगों की राय को अपनी पैरेंटिंग के बीच नहीं आने दिया।

दिल की सुनकर लिए हर फैसले

IANS को दिए एक इंटरव्यू में कुणाल ने कहा कि जब बात बेटी की परवरिश की आती है तो उन्होंने और सोहा ने हमेशा वही किया, जो उन्हें सही लगा। उनके मुताबिक, माता-पिता बनने के बाद हर फैसला अनुभव और परिस्थितियों से सीखते हुए लिया गया। उन्होंने बताया कि किसी किताब या समाज के बनाए नियमों से ज्यादा उन्होंने अपनी समझ और भावनाओं पर भरोसा किया।

कुणाल का मानना है कि हर परिवार का अपना तरीका होता है और किसी भी बच्चे की परवरिश का एक तय फॉर्मूला नहीं हो सकता। इसलिए उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि लोग उनके फैसलों को पसंद करेंगे या उनकी आलोचना करेंगे।

लोगों की सोच को नहीं बनाया पैमाना

अभिनेता ने स्वीकार किया कि उनकी कुछ बातों से कई लोग सहमत रहे, जबकि कुछ लोगों ने आपत्ति भी जताई। लेकिन उनके लिए सबसे अहम बात यह थी कि उनकी बेटी को प्यार, सम्मान और बेहतर संस्कार मिलें। उन्होंने कहा कि अगर हर फैसला सिर्फ समाज को खुश करने के लिए लिया जाए, तो परिवार अपनी असली पहचान खो देता है।

कुणाल ने साफ शब्दों में कहा कि वह और सोहा कभी इस सोच के साथ कोई कदम नहीं उठाते कि लोग उन्हें "आदर्श माता-पिता" मानेंगे या नहीं। उनके लिए बेटी की खुशहाल परवरिश सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

पैरेंटिंग में होती है छोटी-छोटी नोकझोंक

हर पति-पत्नी की तरह कुणाल और सोहा के बीच भी कई बार पैरेंटिंग को लेकर मतभेद हो जाते हैं। अभिनेता ने मुस्कुराते हुए बताया कि कई बार सोहा उन्हें बेटी को ज्यादा लाड़-प्यार देने के लिए टोकती हैं। वहीं कुछ मौकों पर उन्हें लगता है कि बच्चों को थोड़ी आजादी भी मिलनी चाहिए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी बेटी को आइसक्रीम खिलाने जैसी छोटी-छोटी बातों पर भी दोनों की राय अलग होती है। लेकिन इन मतभेदों के बावजूद दोनों का मकसद हमेशा एक ही रहता है—इनाया का बेहतर भविष्य।

एक घर में कई त्योहारों की खुशियां

सोहा अली खान मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जबकि कुणाल खेमू हिंदू परिवार से आते हैं। ऐसे में दोनों ने अपनी बेटी को किसी एक धार्मिक पहचान तक सीमित रखने के बजाय दोनों परंपराओं से परिचित कराया है।

उनके घर में ईद, दिवाली, क्रिसमस और महाशिवरात्रि जैसे त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। कुणाल का मानना है कि अलग-अलग परंपराओं से जुड़ने से बच्चों का नजरिया व्यापक होता है और वे हर संस्कृति का सम्मान करना सीखते हैं।

रिश्तों की सबसे बड़ी सीख

कुणाल खेमू की बातों से साफ झलकता है कि उनके लिए पैरेंटिंग का मतलब केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा माहौल तैयार करना है जहां बच्चा बिना किसी डर के सीख सके, सवाल पूछ सके और हर संस्कृति का सम्मान करना जाने। उनका मानना है कि समाज की अपेक्षाओं से ज्यादा जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चे के लिए ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ फैसले लें। यही सोच आज उनके परिवार की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।