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‘उनकी हालत गंभीर थी’ मुमताज ने सुनाया हॉस्पिटल का वो दिल दुखा देने वाला किस्सा, बोलीं- मिल नहीं पाई

Mumtaz On Asha Bhosle: मुमताज को जैसे ही खबर मिली थी कि आशा भोसले हॉस्पिटल में एडमिट हैं वह तुरंत पहुंच गई थी, लेकिन उन्हें वहां उनसे मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने उस समय को याद करते हुए बताया कि कैसे और कब उन्हें आशा ताई के निधन की खबर मिली थी।

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Mumtaz big revealed on Asha Bhosle critical condition in hospital said i couldnt talk her

मुमताज और आशा भोसले

Mumtaz On Asha Bhosle: भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी जादुई आवाज से आठ दशकों तक दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली महान गायिका आशा भोसले सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 92 साल की उम्र में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली थी। जिसके बाद पूरे देश और इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई थी।

आशा भोसले को देखने हॉस्पिटल पहुंची थी मुमताज (Mumtaz On Asha Bhosle)

इस दुखद घड़ी में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मुमताज ने आशा जी के साथ बिताए अपने आखिरी पलों को याद करते हुए दिल छू लेने वाली बातें शेयर कीं। मुमताज ने मीडिया को बताया, "जैसे ही मुझे उनके अस्पताल में होने की खबर मिली, मैं तुरंत वहां पहुंची। मैं उनसे बस एक बार बात करना चाहती थी, लेकिन उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने इसकी इजाजत नहीं दी। भारी मन से जब मैं अस्पताल की पार्किंग से बाहर निकल ही रही थी, तभी उनके परिवार का फोन आया कि आशा जी अब नहीं रहीं।"

मुमताज ने भावुक होते हुए आगे कहा, "अगले दिन जब मैं उनके घर अंतिम दर्शन के लिए गई, तो उन्हें देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह चली गई हैं। उनके चेहरे पर एक अजीब सा नूर और शांति थी, जैसे वह गहरी नींद में सोई हों।"

मुमताज का खुलासा: ये था आशा ताई का सबसे कठिन गाना (Mumtaz On Asha Bhosle Song)

मुमताज और आशा भोसले की जोड़ी ने 'कोई शहरी बाबू' और 'दुनिया में लोगों को' जैसे दर्जनों सुपरहिट गाने दिए। मुमताज ने बताया कि आशा जी अक्सर उनके गानों के बारे में चर्चा करती थीं। उन्होंने कहा, "आशा जी हमेशा मुझसे कहती थीं कि 'आजा ओ मेरे राजा' गाना उनके पूरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण गाना था। इसमें उन्हें अपनी आवाज में कई तरह के उतार-चढ़ाव और बदलाव करने पड़े थे, जो काफी मुश्किल था।"

लता-आशा दोनों से था मुमताज का रिश्ता

मुमताज ने एक निजी किस्सा सुनाते हुए बताया कि मंगेशकर परिवार के साथ उनका रिश्ता काम से कहीं बढ़कर था। उन्होंने याद किया, "मेरे जवानी के दिनों में जब लता जी और आशा जी तानपुरा लेकर रियाज करने बैठती थीं, तो मैं अक्सर उनकी गोद में सिर रखकर लेट जाती थी। वह मुझे बहुत प्यार करती थीं।"

राजकीय सम्मान और गन सैल्यूट (Asha Bhosle cremated in Mumbai with full state honours)

आशा ताई की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को पुलिस की टुकड़ी ने 'गन सैल्यूट' (बंदूकों की सलामी) देकर सम्मानित किया। मंत्रों के उच्चारण और 'आशा ताई अमर रहें' के नारों के बीच उनके बेटे आनंद भोसले ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। 12,000 से ज्यादा गानों की विरासत छोड़कर जाने वाली आशा भोसले भले ही आज शारीरिक रूप से विदा हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज हर भारतीय के दिल में हमेशा गूंजती रहेगी।

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