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‘Pati Patni Aur Woh’ और ‘Panipat’ देखने से पहले, यहां पढ़ें मूवी रिव्यू

बॉलीवुड की दो बड़ी मूवीज रिलीज होने जा रही हैं। रोमांटिक कॉमेडी 'Pati Patni Aur Woh' की पीरियड वॉर ड्रामा 'Panipat' से टक्कर होगी। ये दोनों फिल्में अलग-अलग जोनर पर बनी है....

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pati patni aur woh and panipat

pati patni aur woh and panipat

कल यानी शुक्रवार को बॉलीवुड की दो बड़ी मूवीज रिलीज होने जा रही हैं। रोमांटिक कॉमेडी 'Pati Patni Aur Woh' की पीरियड वॉर ड्रामा 'Panipat' से टक्कर होगी। ये दोनों फिल्में अलग-अलग जोनर पर बनी है। सोशल मीडिया पर दोनों ही फिल्मों के रिव्यू आ गए। निर्देशक और लेख़क मुदस्सर अजीज की फिल्म 'पति, पत्नी और वो' में कार्तिक आर्यन, अनन्या पांडे और भूमि पेडनेकर के काम की तारीफ की जा रही है। यह फिल्म कॉमेडी के साथ सबक भी देती है। आशुतोष गोवारिकर ने फिल्म ‘पानीपत’ एक ऐसी एतिहासिक कहानी पर बनाई है जिसमें रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ पानीपत की तीसरी लड़ाई के बारे में बताया गया है। जो अफगानिस्तान के शासक अहमद शाह अब्दाली और मराठाओं के बीच लड़ी गई थी। जिसका नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ ने किया था।

पति पत्नी और वो
फिल्म की कहानी शुरू होती है कानपुर में रहने वाले चिंटू त्यागी (कार्तिक आर्यन) से। चिंटू बचपन से अपने पिता के सख्त अनुशासन में पढ़-लिखकर इंजीनियर बन जाता है। सरकारी नौकरी भी लगा जाती है और पिता के कहने पर वेदिका (भूमि पेडणेकर) से शादी कर लेता है। शादी के कुछ समय बाद कहानी में अचानक ट्विस्ट आता है। चिंटू त्यागी की ऑफिस में एक खूबसूरत लड़की तपस्या आती है। इसके बाद तो मानो चिंटू त्यागी पगला ही जाते हैं। चिंटू के दिल में उस लड़की के लिए रोमांस की चिंगारी जलने लगती है। दोनों की दोस्ती भी हो जाती है। फिर तपस्या को पता चलता है कि चिंटू त्यागी शादीशुदा हैं। लेकिन चिंटू भाई अपनी चालाकी से शादी की लंबी-चौड़ी कहानी का पिटारा खोल देते हैं और सिचुएशन को संभाल लेते हैं। चिंटू तपस्या को यह बताते हैं उनकी बीवी का एक्सट्रा मैरिटल अफेयर है। फिर चिंटू त्यागी की वॉट लगना शुरू हो जाती है और फिर होता है जमकर हंगामा और जोरदार ड्रामा। पति-पत्नी और वो एक मनोरंजक फिल्म है, जिसे आप परिवार के साथ देख सकते हैं। जहां हर इंसान कहीं ना कहीं मन में दबी-छुपी भावनाओं का ग्लैमर का गुलाम बनकर अपनी नैतिकता भुला देता है।

पानीपत
पानीपत की कहानी इतिहास के पन्नों को दर्शाती दिखाई देती है। जहां सदाशिवराव भाऊ (अर्जुन कपूर) अपने कजिन नानासाहब पेशवा (मोहनीश बहल) की मराठा आर्मी का कमांडर होता है। निजाम ऑफ उदगीर को हराने के बाद सदाशिवराव का चुनाव मराठा सेना के प्रमुख के रूप में किया जाता है जो दिल्ली में अहमद शाह अब्दाली (संजय दत्त) के खिलाफ लड़ने के लिए अपनी सेना तैयार करते हैं। वहीं, अहमद शाह अब्दाली को जब ये बात पता चलती है तो वे नजबी-उद्-दौला के साथ मिलकर मराठाओं के खिलाफ युद्ध के मैदान में उतर जाते हैं। जिससे जीत हासिल करने के बाद वे अपनी पावर को बढ़ा सकें। फिल्म में आपको साथ-साथ सदाशिवराव और पार्वती बाई की प्रेम कहानी भी देखने को मिलेगी। जो आपको बांधे रखेगी। दोनों की ही केमिस्ट्री काफी दिलचस्प दिखाई गई है। हालांकि, कई जगहों पर आपको फिल्म जरूरत से ज्यादा खींची गई भी दिखाई देगी।