
रत्ना पाठक शाह (फोटो सोर्स- IMDb)
Ratna Pathak Shah On GenZ: अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह ने आज की युवा पीढ़ी के बीच बीते दौर को लेकर बढ़ती नॉस्टेल्जिया यानी पुरानी यादों के आकर्षण पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज के कई युवा उस दौर के लिए भी नॉस्टेल्जिक हो रहे हैं, जिसे उन्होंने कभी अनुभव ही नहीं किया। अभिनेत्री ने सवाल उठाया कि इस तरह की कल्पना और आदर्शीकृत अतीत की तस्वीरें युवा दिमाग पर किस तरह का असर डाल रही हैं।
रत्ना पाठक शाह ने यह बात 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित लिटरेचर लाइव! द मुंबई लिटफेस्ट 2026 के दौरान लेखक जेरी पिंटो के साथ बातचीत में कही। साहित्य और सिनेमा से जुड़े इस कार्यक्रम की शुरुआत 23 अक्टूबर से हुई थी। पहले दिन जेरी पिंटो ने अपनी नई किताब ‘यूरी एंड द सिटी’ को लेकर चर्चा की और इसी दौरान रत्ना पाठक शाह के साथ उनकी बातचीत हुई।
कार्यक्रम में रत्ना पाठक शाह ने जेरी पिंटो की किताब ‘द एजुकेशन ऑफ यूरी’ के कुछ अंश भी पढ़े। इसके बाद उन्होंने उनकी नई किताब ‘यूरी एंड द सिटी’ के कुछ हिस्से पढ़े। दोनों के बीच बातचीत में लेखन, नॉस्टेल्जिया और आज की युवा पीढ़ी जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
बातचीत के दौरान जेरी पिंटो ने अपने लेखन में नॉस्टेल्जिया के इस्तेमाल पर कहा कि अतीत को अक्सर बेहद खूबसूरत और स्वीकार्य रंगों में पेश किया जाता है, जबकि वास्तविकता हमेशा ऐसी नहीं थी। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए रत्ना पाठक शाह ने कहा कि आज के युवा नॉस्टेल्जिया को बिल्कुल अलग तरीके से देख रहे हैं।
अभिनेत्री ने कहा कि युवा उस समय के लिए भी नॉस्टेल्जिक महसूस करते हैं, जिसे उन्होंने खुद देखा या जिया नहीं है। उनके मुताबिक, कई युवा अपने माता-पिता की जिंदगी को लेकर भी एक तरह की पुरानी यादों वाली भावना रखते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वह दौर ज्यादा सुरक्षित और सरल था।
रत्ना पाठक शाह ने इसके उदाहरण के तौर पर फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज जब लोग ऐसी फिल्में देखते हैं तो अक्सर कहते हैं कि उस समय की जिंदगी कितनी प्यारी थी और सब कुछ कितना अच्छा था। हालांकि, अभिनेत्री का मानना है कि पुरानी फिल्मों में दिखाई गई सामाजिक जिंदगी और रिश्तों की तस्वीर को पूरी तरह वास्तविक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि उस दौर में भी पुरुषों और महिलाओं के बीच रिश्ते उतने सरल नहीं थे, जितने कई फिल्मों में दिखाई देते हैं। रत्ना पाठक शाह ने इस बात पर चिंता जताई कि जब युवा ऐसी आदर्शीकृत तस्वीरों को वास्तविक अतीत मानने लगते हैं तो इसका उनके सोचने के तरीके पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें इस बात को देखकर आज के युवाओं के लिए बहुत अफसोस होता है। उन्होंने युवाओं के बदलते सोचने के तरीके और उनकी जिंदगी में बढ़ती जटिलताओं पर भी बात की। सोशल मीडिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिन परिस्थितियों से गुजर रही है, उनसे निपटना उनके लिए आसान नहीं होता।
रत्ना पाठक शाह और जेरी पिंटो की यह बातचीत गॉडरेज लिटरेचर लाइव! द मुंबई लिटफेस्ट 2026 के प्रमुख सत्रों में से एक रही। इस दौरान साहित्य, सिनेमा, अतीत की यादों और युवा पीढ़ी की सोच को लेकर हुई चर्चा ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
Updated on:
24 Oct 2026, 1:21 PM IST
Published on:
24 Oct 2026, 1:17 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.