
shashi kapoor
लंबी बीमारी के चलते पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे यानी राजकपूर के सबसे छोटे भाई यानी रणबीर कपूर के सबसे छोटे ताऊ शशि कपूर का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को मुंबई में निधन हो गया। वे ७९ साल के थे। बेशक शशि कपूर बॉलीवुड में बहुत बड़ी लंबी पारी नहीं खेली, लेकिन उन्होंने बतौर अभिनेता जितना भी वक्त बॉलीवुड में गुजारा, वह बेमिसाल था। पहली फिल्म धर्मपुत्र के बाद लगतार कई फिल्में लुढक़ीं, लेकिन वो डटे रहे। आखिरकार, उनका भी वक्त आया और जब जब फूल खिले ने उन्हें सितारा बना दिया। करीब 150 फिल्मों में शशि कपूर ने काम किया। वो पर्दे पर हर तरह के किरदार निभाए और खूब पसंद किए गए। उनकी मुस्कान में आकर्षण था।
बतौर नायक शशि कपूर कई हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों में काम किया था। चूंकि, कई बेहतरीन फिल्में देने के बाद भी बतौर नायक उनका कॅरियर बॉलीवुड में लंबा नहीं चला। ‘जब जब फूल खिले’ (1965), ‘ वक्त’ (1964), ‘अभिनेत्री’ (1970), ‘दीवार’ (1975), ‘त्रिशूल’ (1978), ‘हसीना मान जाएगी’ (1968) जैसी उल्लेखनीय फिल्में हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया, जबकि बतौर निर्माताशशि कपूर बतौर निर्माता भी बॉलीवुड में सक्रिय रहे। उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों का निर्माण किया था। इनमें ‘जुनून’ (1978), ‘कलियुग’ (1980), 36 ‘चौरंगी लेन’ (1981), ‘विजेता’ (1982), ‘उत्सव’ (1984) जैसी फिल्में उल्लेखनीय हैं।
शशि कपूर के फिल्मी कॅरियर को याद करते हुए यहां हम उनके कुछ बेहतरीन संवादों के बारे में जिक्र कर रहे हैं...खास आपके लिए...
दीवार
दीवार का यह डायलॉग तो बच्चे-बच्चे को याद है जब फिल्म में बड़े भाई का किरदार निभा रहे अमिताभ छोटे भाई से कहते हैं, ‘आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है... तुम्हारे पास क्या है?’ तब शशि कपूर कहते हैं, ‘मेरे पास मां है।’
सिलसिला
हम गायब होने वालों में से नहीं हैं. हम जहां जहां से गुजरते हैं, जलवे दिखाते चलते हैं. दोस्त तो क्या, हमें तो दुश्मन भी याद रखते हैं।
रोटी, कपड़ा और मकान
यह मत सोचो कि देश तुम्हें क्या देता है, यह सोचो कि तुम देश को क्या दे सकते हो।
दीवार
जब तक एक भाई बोल रहा है, एक भाई सुन रहा है. जब एक मुजरिम बोलेगा तो एक पुलिस अफसर सुनेगा।
नमक हलाल
यह प्रेम रोग है। शुरू में सुख देता है, लेकिन बाद में बहुत दुख देता है।
कभी-कभी
इस दुनिया में आदमी इंसान बन जाए तो बहुत बड़ी बात है।
दीवार
जब एक पुलिस अधिकारी के रूप में शशि कपूर अमिताभ बच्चन से पूछते हैं कि भाई, तुम साइन करोगे या नहीं?
एक और एक ग्यारह
अपना तो सिर्फ एक ही उसूल है, जियो तो अपने लिए और सोचो तो दूसरों के लिए।
कभी कभी
मैं जरा रोमांटिक किस्म का आदमी हूं। शादी के बाद इश्क करना छोड़ दिया है, इसलिए बीवी से रोमांस करके काम चला लेता हूं।
दीवार
ज्यादा पैसा आ जाता है, तो नींद नहीं आती है और अगर नींद ज्यादा आए, तो ज्यादा पैसा नहीं आता है।

Published on:
05 Dec 2017 02:20 pm
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