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RIP SHASHI KAPOOR: एक था गुल

सत्तर और अस्सी के दशक में रोमांस ऑफ स्क्रीन आयकन के तौर पर फेमस थे शशि कपूर...उन्हें बॉलीवुड का प्रिंस चार्मिंग भी कहा जाता था...

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Dilip Chaturvedi

Dec 04, 2017

shashi kapoor

shashi kapoor

दिग्गज अभिनेता-निर्माता शशि कपूर का सोमवार को यहां के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 79 साल के थे। शशि ने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में शाम 5.20 बजे अंतिम सांस ली। अस्पताल के कार्यकारी निदेशक डॉ. राम नरेन ने आईएएनएस को एक संदेश में यह जानकारी दी। इसके अलावा शशि के भतीजे और अभिनेता रणधीर कपूर ने आईएएनएस को उनके निधन पुष्टि की।

अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल ने ट्वीट किया, "मैं मेरे सह-कलाकार रहे शशि के निधन से बेहद दुखी हूं। कपूर खानदान की उस पीढ़ी का अंतिम चिराग बुझ गया। एक युग का अंत हो गया। उनकी फिल्में और बहुमूल्य यादें रह गई हैं।" शशि 70 व 80 के दशक के शुरुआती सालों में रोमांटिक आईकॉन के रूप में उभरे थे। फिल्म जगत में फिल्म समीक्षक और व्यापार विश्लेषक तरण आदर्श ने ट्वीट किया, "शशि अब नहीं रहे। एक युग का अंत हो गया।"

शशि फिल्म जगत में कपूर खानदान की नींव रखने वाले दिवंगत अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के तीन बेटों में सबसे छोटे थे। उनसे बड़े राज कपूर और शम्मी कपूर थे। 2012 में शशि के मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी। एंग्लो-इंडियन थियेटर कलाकार जेनिफर किंडेल से शादी करने वाले शशि के तीन बच्चे-कुनाल, करन और संजना कपूर हैं। शशि ने 1961 में यश चोपड़ा की 'धर्मपुत्र' के साथ फिल्म जगत में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने 150 से अधिक फिल्मों में काम किया।


दिलों में उतर गई शशि की मुस्कान
'जब-जब फूल खिले' एक खूबसूरत और मासूम प्रेम कहानी जब पर्दे पर उतरी, तो एक मुस्कुराते हुए नायक की छवि भी दर्शकों के जेहन में उतर गई। ये थे शशि कपूर, जो कपूर खानदान से होने के बावजूद उसके असर से एकदम मुक्त नजर आए। यूं फिल्मी दुनिया में उनका आगाज तो बचपन में ही हो चुका था।
पृथ्वीराज कपूर के इस सबसे छोटे बेटे को अभिनय यूं तो विरासत में मिल ही चुका था। खेलने के लिए सिर्फ घर का आंगन ही नहीं था, पृथ्वीराज थिएटर भी था। नाटक करते-करते एक बच्चे ने अभिनय की पाठशाला में कब दाखिला ले लिया, उसे पता ही न चला। वो बाल कलाकार बना। अपने बड़े भाई राज कपूर की फिल्मों 'आग' और 'आवारा' में भी नजर आया।

फूल खिलने से पहले...

बतौर अभिनेता शशिकपूर का सिनेमाई सफर 1961 में यश चोपड़ा की फिल्म 'धर्म पुत्र' से हुआ। इसके बाद वे विमल राय की फिल्म 'प्रेम पत्रÓ में भी नजर आए, लेकिन सिनेमाहॉल में भीड़ नजर ना आई। बाद की कुछ फिल्मों के भी यही हाल रहे, फूल खिलने से पहले ये असफलताएं कांटे की तरह उनके दामन में उलझती रही, लेकिन वे खुद बेहद सुलझे हुए थे। अपने उसी भरोसे के साथ जब 1965 में वे अभिनेत्री नंदा के साथ 'जब जब फूल खिले' में कश्ती चलाते नजर आए, तो उनके कॅरियर की नैया भी पार लग गई। फिल्म की मासूम कहानी और कर्णप्रिय संगीत आज भी लोग पसंद करते हैं, 'परदेसियों से ना अंखिया मिलना...' ऐसा ही एक खूबसूरत गीत है।

...और बदल गया 'वक्त'

1965 में शशि कपूर के कॅरियर की एक और सुपरहिट फिल्म फिल्म 'वक्त' रिलीज हुई। यूं ये मल्टीस्टारर मूवी थी। इसमें बलराज साहनी, राजकुमार और सुनील दत्त जैसे नामी सितारे थे, बावजूद शशि कपूर यहां भी अपनी मासूमियत का असर छोडऩे में कामयाब हुए। इन फिल्मों ने उनकी छवि को रूमानियत में ढाल दिया। तकरीबन एक दशक तक वे इसी छवि में बंधे रहे और लुभाते रहे। 1980 के दशक में शशि कपूर अभिनीत फिल्में चोर मचाए शोर, दूसरा आदमी और सत्यम, शिवम् ,सुंदरम बहुत हिट साबित हुई।

मेरे पास मां है...

अमिताभ बच्चन का दौर शुरू होते ही फिल्मों से रोमांस कम होने लगा। शशि कपूर इन बदले हालातों में भी ढल गए और सहनायक के रूप में भी उन्होंने बेहतर काम किया। अमिताभ के साथ उन्होंने कई हिट फिल्में दी। इनमें त्रिशूल, कभी- कभी, सुहाग, सिलसिला, नमक हलाल, काला पत्थर, दीवार आदि शामिल है। दीवार का यह डायलॉग तो बच्चे-बच्चे को याद है जब फिल्म में बड़े भाई का किरदार निभा रहे अमिताभ छोटे भाई से कहते हैं, 'आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है... तुम्हारे पास क्या है?' शशि कपूर कहते हैं, 'मेरे पास मां है।'


और जब शशि के पर कतर दिए गए...

बीस साल के युवा शशि ने जेनिफर से प्रेम विवाह किया था। उनके इश्क की दास्तां किसी से छिपी नहीं, खुद उनके शब्दों में उनकी प्रेम कहानी इस तरह थी, 'मैंने जेनिफर को पहली बार थिएटर में बैठे हुए देखा थे। वह हमारा एक प्ले देख रही थीं। बात 1956 की है। हम कलकत्ता में एंपायर नाम के एक बेहद खूबसूरत थिएटर में अपने शो कर रहे थे। हमारा प्ले चार ह ते तक चलने वाला था। हालांकि, हमने इसे अच्छा परफॉर्म किया कि हमें आगे जारी रखने के लिए कहा गया। इसका मतलब यह था कि वहां परफॉर्म करने वाली अगली कंपनी यानी जियोफ्री केंडल की शेक्सपियराना इंटरनेशनल थिएटर कंपनी को इंतजार करना पड़ा। ऐसे में वे लोग हमारे प्ले देखने के लिए आते और मैं अक्सर उस खूबसूरत लड़की (जेनिफर) को एक ही पंक्ति में बैठे हुए देखा करता था। बाद में मुझे पता चला कि वह मिस्टर केंडल की बेटी जेनिफर हैं।' शशि के कजिन भाई ने दोनों की मुलाकात करवाई, तब तक शशि के कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी। जेनिफर उनकी जिंदगी की पहली महिला थीं, पहली प्रेमिका जो पत्नी बन गई। तब शशि की उम्र बीस साल की थी। शशि के मुताबिक, 'यह एक ऐसा मोर्चा था, जहां मैं हार गया था। मेरे कई दोस्त और घरवाले कहने लगे थे, 'शशि के पर कतर दिए गए। अभी तो उसने उडऩा भी नहीं सीखा था।'